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गुरुवार, दिसंबर 09, 2010

आजमगढ़ का लालगंज और चुलबुल पाण्डेय की दबंगई

उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल बेल्ट काफी दबंग माना जाता है. तमाम हिंदी-फिल्मों की थीम यहाँ के इर्द-गिर्द घूमती हैं. आजकल सलमान खान की ‘दबंग‘ फिल्म चर्चा में है और उसके केंद्र में इसी बेल्ट के आजमगढ़ जिले के लालगंज क्षेत्र की कहानी है. एक तरफ जहाँ फिल्मों का स्वरूप बदलने लगा है वहीं दबंग अभी भी इस भोजपुरी बेल्ट को समेटे हुए है। वैसे भी भोजपुरी इलाके का तड़का फिल्मों को मशहूर कर देता है। याद कीजिए शिल्पा शेट्टी का - आई हूँ यू-पी-बिहार लूटने। यू-पी-बिहार के भैया लोग तो देश के कोने-कोने में भरे हुए हैं। विदेशों में भी उनकी भारी तादात है। उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ तो अपनी इन्हीं अदाओं के कारण दुनिया भर में मशहूर है। कभी राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध‘, शिब्ली नोमानी व कैफी आजमी के नाम से पहचाना जाने वाला आजमगढ़ पिछले कई सालों से आतंकवाद के चलते चर्चा में रहा है. इसकी सच्चाई क्या है, यह एक व्यापक बहस का विषय हो सकता है पर मीडिया ने फ़िलहाल इसे इसे रूप में प्रचारित किया है.

आजमगढ़ से जुडी एक दिलचस्प दास्तां पर गौर कीजिए-कुछ साल पहले नेपाल में एक शूटर को मार गिराया गया। उस शूटर के पास से एक देशी कट्टा बरामद हुआ, जिस पर लिखा था ‘मेड इन बम्हौर‘। नेपाल पुलिस को ‘बम्हौर‘ नामक देश ढूँढने में पसीने छूट गए। फिर अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक शख्स से उन्हें जानकारी मिली कि बम्हौर किसी देश का नहीं बल्कि उ0 प्र0 में आजमगढ़ के एक गाँव का नाम है जहाँ गन्ने के खेतों के बीच बकायदा देशी कट्टे बनाए जाते हैं और इनका निशाना अचूक होता है। यह सुनकर तो नेपाल पुलिस का माथा भी चकरा गया। आजमगढ़ को आतंक का पर्याय बनाने में मीडिया ने कोई कसर नहीं छोड़ी . यहाँ का संजरपुर गाँव चर्चा में बना रहा. बड़े-बड़े नेता जाकर वहाँ राजनीति की रोटियाँ सेंक आए। अब इसमें आजमगढ़ का क्या दोष है कि अबू सलेम भी आजमगढ़ का बाशिंदा है और लोगों की मानें तो दाउद इब्राहिम का ननिहाल भी यहीं है। महाराष्ट्र के चर्चित सपा नेता अबू आसिमी, जिन पर विधानसभा में थप्पड़ तक उठाया गया, मूलतः आजमगढ़ के ही हैं। दुर्भाग्यवश नकारात्मक चीजें जल्दी चर्चा में आती हैं.

‘दबंग‘ फिल्म में सलमान खान जिस उ0 प्र0 के लालगंज नामक इलाके के दुस्साहसी पुलिस इंस्पेक्टर बने हैं, वह भी आजमगढ़ में ही है। याद कीजिए कभी ममता बनर्जी ने संसद में लोकसभा सदस्य तूफानी सरोज की कालर पकड़ ली थी, तब वे लालगंज से ही सांसद थे। उ0 प्र0 विधानसभा के अध्यक्ष सुखदेव राजभर भी लालगंज के ही प्रतिनिधि हैं। लालगंज की महिमा अभी भी समझ में नहीं आई तो हाई-प्रोफाइल नेता नेता अमर सिंह भी लालगंज से ही हैं। यूँ ही अभिनव कश्यप ने ‘लालगंज‘ इलाके को नहीं चुना है। एक तो आजमगढ़ इधर नकारात्मक रूप में काफी चर्चित रहा है और लालगंज भी चर्चित क्षेत्र है. यह आजमगढ़-बनारस रोड पर स्थित है. चूँकि यह जिस बेल्ट में है, वहां दबंगई भी मिलेगी, भ्रष्ट लोग भी मिलेंगें, भोजपुरी पुट भी मिलेगा, ‘मुन्नी‘ भी मिलेगी और ‘झंडु बाम‘ भी...यानि एक फिल्म के लिए पूरा मसाला. क्या पता कल को सलमान खान किसी के चुनाव में यहाँ प्रचार करने आयें और लालगंज में चुलबुल पांडे की दबंगई से सचमुच उनकी मुलाकात हो जाये !!