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शनिवार, मई 25, 2013

पुण्य तिथि पर याद किये गए चंद्रजीत यादव




आजमगढ़: पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चंद्रजीत यादव की पांचवी पुण्यतिथि पर शुक्रवार, 24 मई 2013 को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। नेहरू हाल के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विधायक डॉ. संग्राम यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव सच्चे राष्ट्रभक्त थे। सिद्धांत के पक्के थे। उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। श्री यादव ने कहा कि पिछड़ों व दलितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए चंद्रजीत यादव आजीवन संघर्ष किया। आज यह देश किधर जा रहा है इस पर सोचने की जरूरत है। आजादी के बाद देश की जो दशा है उस पर यदि नजर दौड़ाई जाय तो यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए हुए पद चिन्हों पर नहीं चलने के कारण समाज की दुर्गति हो रही है। 

विधायक आलमबदी ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने प्रतिभा के धनी थे। पूर्व सांसद बलिहारी बाबू व रामकृष्ण यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने देश ही नहीं विदेशों में भी इस जनपद की अलग पहचान बनाई। रामअचल यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने सामाजिक न्याय आंदोलन को खड़ा कर यह बता दिया कि उनके दिल में समाज के प्रति कितना लगाव था। 

कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्व. श्री यादव की धर्मपत्‍‌नी आशा यादव ने स्व. श्री यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। इस अवसर पर जय प्रकाश नारायण, इम्तेयाज बेग, बनवारी लाल जालान, मोती राम यादव, सच्चिदानंद राय, चुन्नन राय, राजकुमार पांडेय, जवाहर सैनी, नरेंद्र सिंह, कैलाश यादव, वसीउद्दीन, संतोष यादव, अशोक यादव, रामजनम यादव, उमा यादव, विजय बहादुर यादव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता विजय बहादुर राय व संचालन वैभव वर्मा ने किया।

(चित्र में : स्व . चंद्रजीत यादव जी की फाइल फोटो)


सोमवार, मार्च 18, 2013

क्रिकेट में दिखा आजमगढ़ कनेक्शन

सरफराज खान उस वक्त आजमगढ़ के अपने गांव बासूपार में थे. वहीं उन्होंने सुना कि मुंबई के हैरिस शील्ड अंडर-16 टूर्नामेंट में अरमान जाफर ने 473 रन बनाकर उनका 439 रनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मुंबर्ई में रहने वाले अपने क्रिकेट कोच पिता नौशाद के साथ सरफराज आजमगढ़ गए थे. आजमगढ़ में छिपी हुई क्रिकेट प्रतिभाओं को ढूंढ़ निकालने और उन्हें मुंबई में मौका देने का श्रेय नौशाद को ही जाता है.
 
नौशाद उत्तर प्रदेश के कस्बेनुमा शहर आजमगढ़ की एक ऐसी कड़ी हैं जो प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को मुंबर्ई पहुंचाते रहते हैं. क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए क्रिकेट की राजधानी मुंबई में वे खुद भी किसी अहम मुकाम से कम नहीं हैं. लेफ्ट आर्म स्पिनर इकबाल अब्दुल्ला घरेलू टूर्नामेंटों में मुंबई की ओर से खेलते हैं और आइपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से. नौशाद के चुने हुए कामयाब खिलाडिय़ों की जमात की उम्दा मिसाल हैं अब्दुल्ला.

आजमगढ़ के दूसरे खिलाड़ी हैं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज कामरान खान. उन्होंने आइपीएल 2009 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए अहम छाप छोड़ी थी. पर तभी गेंद फेंकने के उनके अंदाज पर सवाल उठ खड़े हुए. नोमान खान भी आजमगढ़ के सरायमीर के तेज गेंदबाज हैं, जिन्हें आइपीएल में कुछ सीरीज पहले मुंबई इंडियंस ने अपने लिए अनुबंधित किया था. वे भी नौशाद के ही ढूंढ़े हुए सितारे हैं.

पूर्व क्रिकेटर और अब कोच नौशाद अपने इस काम के बारे में बताते हैं, “मैं हर साल बासूपुर गांव (आजमगढ़ शहर से कुछ किलोमीटर दूर) जाता हूं. लेकिन घर में मैं कम ही रह पाता हूं. घर तो मैं सिर्फ रात में सोने के लिए ही आता हूं. मैं सरफराज के साथ अभ्यास सत्र आयोजित करता रहता हूं और प्रतिभावान बच्चों को ढूंढ़ता रहता हूं.” इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान वे खिलाडिय़ों को प्रेरित करने की अपनी शैली के बारे में बताते हैं, “मैं कुछ मशहूर शायरों के शेर उन नौजवानों को सुनाता हूं. जैसे यही कि एक पत्थर की भी तक़दीर बदल सकती है, शर्त ये है के सलीक़े से तराशा जाए.

अरमान जहां पढ़ रहे हैं, उस रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल के कोच राजू पाठक भी उत्तर प्रदेश में बस्ती जिले की हर्रैया तहसील के हैं. वे बताते हैं कि मुंबई में जो गैर-मराठी बच्चे क्रिकेट खेलने आते हैं, उनका महाराष्ट्र के इस राजधानी शहर में कोई न कोई संपर्क जरूर रहता है. इनमें से कई तो स्प्रिंगफील्ड स्कूल के हॉस्टल में रहते हैं. हम प्रतिभाशाली बच्चों से कोई फीस नहीं लेते. ऊपर से उन्हें क्रिकेट की किट वगैरह भी देते हैं.” यह स्कूल एक ऐसी जगह है जहां क्रिकेट में प्रतिभा रखने वाले बच्चों को उत्साह और आश्रय मिलता है.

लेकिन मुंबर्ई के बाहर से आने वाले और स्थानीय प्रतिभाओं को चुनौती देने वालों के लिए कई बार राह आसान नहीं होती है. मुंबर्ई क्रिकेट एसोसिएशन के एक अधिकारी सचाई बयान करते हैं, “मुंबई वाला भी सैकड़ा मारता है और मुंबर्ई के बाहर वाला भी 100 रन बनाता है तो उसे कोई फायदा नहीं होने का. बाहर से आए खिलाड़ी को नजर में आने के लिए 150-200 रन बनाने होंगे. मुंबर्ई में आकर क्रिकेट में किस्मत आजमाने वालों के लिए थोड़ा भेदभाव तो है.”

सौजन्‍य: इंडिया टुडे

मंगलवार, मार्च 05, 2013

प्रिंट मीडिया ने हाथों-हाथ लिया ‘आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी’ को

आजमगढ़ में हुई द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ को अख़बारों ने हाथों-हाथ लिया। एक तो नौ साल बाद ऐसी प्रदर्शनी, आजमगढ़ से जुड़ी दो महान साहित्यिक विभूतियों पर विशेष डाक आवरण का जारी होना, पूर्वञ्चल में पहली बार माई स्टैम्प सेवा का आरंभ होना, बहुत कुछ इस प्रदर्शनी में था। विभिन्न अख़बारों में प्रकाशित समाचारों को क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

 





 


 



 

 

सोमवार, मार्च 04, 2013

साहित्यिक रूप से उर्वरा रही है आजमगढ़ की धरती – कृष्ण कुमार यादव




द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ का समापन वेस्ली इंटर कॉलेज आजमगढ़ में आयोजित भव्य समारोह में 3 मार्च को किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद व गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने दूसरे दिन के कार्यक्रम का उदघाटन किया। श्री यादव ने इस अवसर पर वीर रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (वर्ष 1907 में ग्राम डुमराव, जिला- आजमगढ़, संप्रति मऊ जनपद में जन्म।) पर विशेष डाक आवरण एवं विरूपण का विमोचन किया। आवरण जारी करने के साथ साथ मुख्य अतिथि श्री यादव ने रिमोट द्वारा इस विशेष आवरण के ब्लो-अप का भी अनावरण किया।

वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (1907 - 1991) पर जारी विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन करते हुए निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्याम नारायण पाण्डेय वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। आप केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे । देश-प्रेम और अपने संस्कृति के प्रति अनुराग ही श्याम नारायण पाण्डेय जी को वीर रस के प्रति आकर्षित करता था। तभी तो उन्होने हल्दीघाटीजौहर जैसे उत्कृष्ट महाकाव्य रचे, जिनमें हल्दीघाटी (काव्य) सर्वाधिक लोकप्रिय और जौहर(काव्य) विशेष चर्चित हुए। हल्दीघाटी में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और जौहर में चित्तौड की रानी पद्मिनी के आख्यान हैं। हल्दीघाटी के नाम से विख्यात राजस्थान की इस ऐतिहासिक वीर भूमि के लोकप्रिय नाम पर लिखे गये हल्दीघाटी महाकाव्य पर आपको उस समय का सर्वश्रेष्ठ सम्मान देव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। श्री यादव ने कहा कि उन्होने आजीवन निश्चल भाव से साहित्य सृजन किया ।

अपने उदबोधन में निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आजमगढ़ की धरती सदैव से ही साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से उर्वर रही है। यह धरा महान विभूतियों की जन्मस्थली-कर्मस्थली रही है, जिन्होने आजमगढ़ का नाम दुनियाभर में फैलाया। ऐसी विभूतियों की स्मृतियों को सहेज कर रखना एवं युवा पीढ़ी को उनके बारे में बताना हमारा कर्तव्य है। डाक विभाग ऐसी विभूतियों पर समय-समय पर डाक टिकट व विशेष आवरण (लिफाफा) जारी कर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने सामाजिक दायित्यों का निर्वहन करता है। श्री यादव ने कहा कि आजमगढ़ की विरासत, स्थापत्य, विभूतियों एवं यहाँ से जुड़े अन्य पहलुओं पर डाक-टिकट एवं विशेष आवरण जारी किए जाने को प्रस्ताव यदि प्राप्त होते हैं तो उन्हे बेहद खुशी होगी।

प्रवर डाक अधीक्षक श्री वाई एन द्विवेदी ने कहा कि एक लंबे अंतराल पश्चात आजमगढ़ में इस प्रकार का आयोजन कर बेहद खुशी हो रही है और जिस तरह से यंहा के लोगों ने प्रदर्शनी को हाथों हाथ लिया है, वह हमारे लिए उत्साहजनक है। इस अवसर पर डा0 शारदा सिंह, पूर्व प्राचार्य, डा0 डी पी, पूर्व प्राचार्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने समापन समारोह में डाक टिकट प्रदर्शनी में विभिन्न ग्रुपों,चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रश्नोतरी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वालों को पुरस्कृत किया। अंतिम दिन होने के चलते माई स्टैम्प के प्रति लोगों का काफी उत्साह दिखा और काफी लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित कराई।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव,जे एम सिन्हा,अनवर जमाल,कमलनाथ यादव,दिलशेर यादव,आर एस सोनकर,डी बी त्रिपाठी,सरदार सिंह यादव सहित तमाम डाक विभाग के अधिकारी, फिलेटिलिस्ट, साहित्यकार एवं शिक्षाविद इत्यादि उपस्थित थे।

(अमर उजाला, 4 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)


(दैनिक जागरण, 4 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)


रविवार, मार्च 03, 2013

‘माई स्टैम्प’ के तहत आजमगढ़ के लोग अपने को डाक-टिकट पर देखकर प्रफुल्लित

डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013, 2-3 मार्च 2013) के दौरान डाक विभाग की बहुचर्चित ' माई स्टैम्प' सेवा का भी शुभांरभ किया गया। इसके तहत चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव सहित तमाम लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित करायी।

आजमपेक्स-2013 के दौरान माई स्टैम्प सेवा 16 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें सिनेरेरिया, डहलिया, लिली और पैन्सी फूलों वाले डाक-टिकट के अलावा 12 राशियों के डाक टिकट शामिल हैं। जहाँ बड़े लोगों में अपनी राशि के साथ डाक.टिकट का क्रेज रहाए वहीँ बच्चों ने रंग.बिरंगे फूलों वाले डाक.टिकटों के साथ अपनी फोटो वाली डाक.टिकटें बनवाईं। कई लोगों ने इस सु.अवसर का भरपूर फायदा उठाया और अपने पूरे परिवार को ही माई स्टैम्प के तहत डाक.टिकटों पर ला दिया। युवाओं में इसके तहत काफी उत्साह देखा गया।

निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि माई स्टैम्प के तहत अपनी तस्वीर वाले डाक-टिकट लगे पत्र देश भर में कहीं भी भेजे जा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं। एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है।

           (जनसंदेश टाइम्स, 2 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)
 
        (हिंदुस्तान, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर : अपना टिकट बनवाने की होड़)

पं0 अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ अब डाक-आवरण पर


आज़मगढ़ ने तमाम साहित्यिक विभूतियों को पल्लवित-पुष्पित किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख नाम है- कवि सम्राट पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का। 'हरिऔध' जी की स्मृति में भारतीय डाक विभाग ने 2 मार्च, 2013 को "आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) के दौरान एक विशेष डाक आवरण और विरूपण जारी किया। उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने इलाहाबाद/गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में इस विशेष डाक आवरण का विमोचन किया।
 

चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी द्वारा रचित खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' का इस समय शताब्दी वर्ष भी मनाया जा रहा है, ऐसे में डाक विभाग द्वारा उन पर विशेष आवरण जारी किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए।
 
 

चर्चित साहित्यकार एवं ब्लागर व सम्प्रति निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हरिऔध जी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हरिऔध जी ने गद्य और पद्य दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी की सेवा की। वे द्विवेदी युग के प्रमुख कवि रहे है। उन्होंने सर्वप्रथम खड़ी बोली में काव्य-रचना करके यह सिद्ध कर दिया कि उसमें भी ब्रजभाषा के समान खड़ी बोली की कविता में भी सरसता और मधुरता आ सकती है।
 

श्री यादव ने कहा कि हरिऔध जी आधुनिक हिंदी खड़ी बोली के पितामह हैं। उन्होंने खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' की रचना करके साहित्य-जगत में शीर्ष स्थान प्राप्त किया । आज भी हरिऔध जी का काव्य ग्रंथ 'प्रिय प्रवास' तथा 'वैदेही वनवास' हिंदी खड़ी भाषा के मील के पत्थर के रुप में स्वीकार किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि हरिऔध जी ने विविध विषयों पर काव्य रचना की है। यह उनकी विलक्षण विशेषता है कि उन्होंने राम-सीता, कृष्ण-राधा जैसे धार्मिक विषयों के साथ-साथ आधुनिक समस्याओं को भी अपनी रचनाओं में लिया है और उन पर नवीन ढंग से अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। वास्तव में देखा जाये तो प्राचीन और आधुनिक भावों के मिश्रण से 'हरिऔध' जी के काव्य में एक अद्भुत चमत्कार उत्पन्न हो गया है।
 

कार्यक्रम में साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह ने हरिऔध जी के जीवन पर प्रकाश डा हुए कहा कि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के निजामाबाद नामक स्थान में हुआ। सन 1889 में हरिऔध जी को सरकारी नौकरी मिल गई। वे कानूनगो हो गए। इस पद से सन 1932 में अवकाश ग्रहण करने के बाद हरिऔध जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अवैतनिक शिक्षक के रूप से कई वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। सन 1941 तक वे इसी पद पर कार्य करते रहे। उसके बाद यह निजामाबाद वापस चले आए। इस अध्यापन कार्य से मुक्त होने के बाद हरिऔध जी अपने गाँव में रह कर ही साहित्य-सेवा कार्य करते रहे। अपनी साहित्य-सेवा के कारण हरिऔध जी ने काफी ख़्याति अर्जित की। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें एक बार सम्मेलन का सभापति बनाया और विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया। सन 1945 ई० में निजामाबाद में आपका देहावसान हो गया।
 

                  (अमर उजाला, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)
 

( हिंदुस्तान 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर : कवि सम्राट पर विशेष डाक आवरण जारी)

शनिवार, मार्च 02, 2013

आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी 'आजमपेक्स-2013' : डाक टिकटों ने बयां की अपनी कहानी

हर डाक टिकट की अपनी एक कहानी है और इस कहानी को वर्तमान पीढ़ी के साथ जोड़ने की जरुरत है। इसी परंपरा में डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) का उद्घाटन 2 मार्च 2013 को वेस्ली इंटर कॉलेज, आजमगढ़ में किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन द्वीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर, उ.प्र. परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र द्वारा इलाहाबाद एवं गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित भव्य कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चियों द्वारा सरस्वती वंदना गाकर किया गया।
 
इस प्रदर्शनी में फिलेटलिस्टों द्वारा तमाम डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगायी गयी। कुल 84 फ्रेमों में हजारों की संख्या में डाक-टिकट प्रदर्शित किए गये। इनमें डाक-टिकटों के माध्यम से सिनेमा के 100 वर्ष, भारत की महान नारी विभूतियाँ, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर जारी डाक टिकट, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर जारी डाक टिकट, भारत के प्रिंस-स्टेट, विश्व के जंगी जहाज, विश्व की रेलवे प्रणालियाँ, क्वींस बैटन, इलाहाबाद से संबंधित विषयों पर जारी डाक-टिकटों से लेकर जैव विविधता, रोटरी, स्काउट एवं गाइड, रेड क्रास और एड्स, इत्यादि के विरूद्ध जागरूक करते तमाम रंग-बिरंगे डाक-टिकट प्रदर्शित किये गये। इनमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों द्वारा जारी दुर्लभ डाक-टिकट व डाक-स्टेशनरी भी शामिल थे। प्रदर्शनी में वरिष्ठ फिलेटलिस्टों के अलावा तमाम बच्चों ने भी अपने डाक-टिकटों का प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि आजमगढ़ में 9 वर्ष बाद इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2004 में डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित हुयी थी।
 
प्रदर्शनी के उद्घाटन पश्चात् आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उ.प्र. परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि डाक विभाग सुदूर एवं छोटे-छोटे शहरों में भी डाक-टिकटों के प्रति अभिरुचि पैदा करने हेतु डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित करता है, ताकि आम जन को इससे जोड़ा जा सके। उन्होंने आजमगढ़ की गौरवशाली परम्परा के प्रचार-प्रसार व इसे समृद्ध करने पर जोर दिया। इस कड़ी में डाक-टिकट प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। कर्नल कमलेश चन्द्र ने इस प्रकार की प्रदर्शनियों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने पर जोर दिया, ताकि अभिरुचि के रूप में फिलेटली का विकास हो सके।
 
इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्व और कीमत दोनों ही इससे काफी ज्यादा है । डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। निदेशक यादव ने कहा कि डाक टिकटों के द्वारा ज्ञान भी अर्जित किया जा सकता है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली को और भी मजबूत बना सकते हैं।
 
इस अवसर पर बच्चों हेतु फिलेटलिक वर्कशाप व कला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। बच्चों ने जहाँ डाक टिकट प्रदर्शनी का आनंद लिया, वहीं फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट भी खोले गये। देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत संगीत.संध्या का भी लोगों ने लुत्फ उठाया।
 
 
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव, साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह, जगदीश प्रसाद बर्नवाल 'कुंद' , डी एन लाल एवं जे एम सिन्हा, अनवर जमाल सहित डाक विभाग के तमाम अधिकारी, कर्मचारी, विद्वतजन, पत्रकार एवं फिलेटिलिस्ट इत्यादि उपस्थित थे।


                (दैनिक जागरण, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)

रविवार, जनवरी 20, 2013

मुबारकपुर की साड़ियों की चमक लौट आये तो क्या कहने!


शबाना आज़मी आज़मगढ़ की रहने वाली हैं आप लोग जानते भी होंगे।ये वही आज़मगढ़ हैं जो अपने बदनामी के दागों को बस धोने में लगा रहता हैं।बहुत सारे जख्म भरते भी नहीं हैं कि नए बन जाते हैं.
खैर आज़मगढ़ की अपनी एक पहचान लम्बे समय से मुबारकपुर की साड़ियों की वजह से भी हैं।बनती तो मुबारकपुर में हैं लेकिन बनारस से जुड़ कर कारोबार चलने के कारण बनारसी साड़ी के नाम से ही विदेशों में मशहूर हैं ।हर दुल्हन की पसंद बनारसी ही होती हैं जीवन में कभी बनारसी साड़ी न भी पहनी हो तो शादी के समय को जरूर पहनती हैं ।लेकिन आज़मगढ़ में बनने वाली ये बनारसी साड़ियाँ बहुत उदास हैं।कभी राहुल गाँधी ने इनको बनाने वालों की समस्याएँ सुनी तो कभी किसी और ने लेकिन बुनकर समुदाय के लोगों का दर्द कोई कम नहीं कर पाया।
 
अभी बीते दिनों शबाना आज़मी अपने गृह जनपद आज़मगढ़ में आई हुई थी। उनका अपने गाँव मेजवा से बहुत गहरा लगाव हैं ।अपने अब्बू कैफ़ी आज़मी के सपने को पूरा करने में 'मुन्नी' ने कोई कसर नहीं छोड़ा हैं। महिलाओं को मजबूत करने और उनके हुनर को अंतरास्ट्रीय पटल पर मेज़वा क्षेत्र में खुले चिकनकारी केन्द्रों के माध्यम से ले जाया जा रहा हैं। एक तरफ शबाना के इन चिकनकारी केन्द्रों पर बनने वाले कपडे मुंबई से होते हुए समुदर पार अपनी धूम मचा रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ मुबारकपुर की साड़ियाँ बनाने वाले बदहाली के आंसू रो रही हैं।
 
  बीते दिनों शबाना का जन्मदिन था और वो आज़मगढ़ में ही थी।जन्मदिन पर शबाना को बधाई देने जनपद के जिलाधिकारी प्रांजल यादव पहुचे।शबाना को हैप्पी बर्थ डे बोलने के साथ ही साथ उन्होंने बनारसी साड़ी भी भेट की।इस बनारसी साड़ी के डिब्बे के साथ उन्होंने शबाना को बनारसी साड़ियों का दर्द भी सुना डाला । शबाना ने जिलाधिकारी से बनारसी साड़ियों का दर्द सुनने के बाद उसके विकास और प्रोत्साहन का भरोसा दिलाया। दिल्ली और मुंबई के कई डिजाइनरों के नंबर भी दिए। वाकई इस पहल सेअगर मुबारकपुर की साड़ियों की चमक लौट आये तो  क्या कहने।

बुधवार, जनवरी 09, 2013

शौहर 111 के तो बेगम 101 की



आजमगढ़ :: शौहर 111 के तो बेगम 101 की। जी हां, इसे सुनकर आप थोड़ा हैरत में जरूर पड़ गए होंगे, लेकिन यह सौ फीसदी सही है। आजमगढ़ का रहने वाला यह जोड़ा द...ुनिया की सबसे पुरानी जोडिय़ों में से एक हो सकता है। इस जोड़ी ने उम्र के मामले में शतक लगा लिया है। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के ड्राइवर रह चुके शौहर को 11 से अधिक भाषाएं आती हैं। वह जापानी, बर्मी, जर्मन, तमिल, तेलुगु, बंगाली समेत कई भाषाओं के जानकार हैं। इस ओल्डेस्ट जोड़ी के पास नेता जी से जुड़ी कई दिलचस्प सच्ची यादें भी हैं जो आज इतिहास के पन्नों में जगह तलाश रही हैं। 

 नेता जी के अंगरक्षक और पर्सनल ड्राइवर रहे आजमगढ़ के 111 साल के निजामुद्दीन एक बार फिर से इतिहास कायम कर सकते हैं। बहुत कम ही ऐसा देखने को मिलता है कि शौहर और बेगम दोनों उम्र के मामले में शतक लगा चुके हों। निजामुद्दीन नेता जी के साथ 12 सिलेंडर वाली गाड़ी चलाते थे। पत्नी अज्बुन निशा से मुलाकात बर्मा में हुई थी 100 वर्षों के ऊपर की ये जोड़ी अपने आप में ही एक इतिहास है।

  बुजुर्ग हो चले निजामुद्दीन के चार पुत्रों में अख्तर अली 85 वर्ष, अनवर अली 82 वर्ष और मोहम्मद अकरम 52 वर्ष के हैं। सबसे छोटे पुत्र असरफ बीमारी से पहले ही मौत हो चुकी है। ड्राइवर निजामुद्दीन ने बताया कि बर्मा में छितांग नदी के पास 20 अगस्त 1947 को उन्होंने नेता जी सुभाष चंद्र बोस को छोड़ा। उसके बाद से उनसे आज तक मुलाकात नहीं हुई। छोटे बेटे अकरम ने बताया कि बाबा की उम्र 111 की और अम्मी 101 साल की हो गयी है। यही नहीं वे 6 भाई बहन है जिसमें से एक भाई की बीमारी के चलते मौत हो गयी है। बाबा नेता जी की गाड़ी चलाया करते थे। 12 सिलेंडर लगी गाड़ी को नेता जी को जौहर बारू के सुल्तान ने उपहार स्वरुप दिया था। 111 साल के निजामुद्दीन ने लडख़ड़ाते जुबान से बताया कि नेता जी शाकाहारी थे। यही नहीं, वह आज़ादी के समय वेश बदलकर क्रांतिकारियों से मिलते थे। निजामुद्दीन ने बताया कि आज़ाद हिन्द फ़ौज का मैं ख़ुफिय़ा अधिकारी भी था।
 
शादी की बात पर 111 साल के निजामुद्दीन ने बताया कि उनका जब निकाह हुआ तो पत्नी अज्बुन निशा बर्मा में थीं। याददाश्त कमजोर होने के कारण ठीक से साल नहीं याद है, लेकिन शादी को लगभग 86 साल के ऊपर हो गए होंगे। नेता जी की मुलाकात एक बार जर्मनी में हिटलर से जब हुई थी, तब वह उनके साथ मौजूद थे। छोटे बेटे अकरम के मुताबित पिता जी ने देश की सेवा की, मगर उनको कोई मदद नहीं मिली आज तक। आज़ादी के बाद पूरा परिवार बर्मा चला गया था, लेकिन पिता जी को गांव की याद बहुत आती थी और 5 जून 1969 को शिप से पूरा परिवार मद्रास आ गया। आज भी गरीबी पूरे परिवार पर हावी है। इस कारण से कभी किसी की शिक्षा.दीक्षा नहीं हो सकी।

 बीएचयू हिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि निजामुद्दीन नेता जी के खुफिया एजेंट तो थे ही, साथ में सबसे करीबी और आज़ाद हिन्द फ़ौज के अधिकारी भी थे। मुखर्जी कमीशन, खोसला कमीशन से लेकर शहनवाज कमिटी तक नेता जी के रहस्यमय ढंग से लापता हो जाने की जानकारी हासिल करने के लिए बनायीं गई, लेकिन बुजुर्ग हो चले निजामुद्दीन का बयान तक नहीं दर्ज किया गया।


मशहूर इतिहासकार तपन घोष ने भी अपनी किताब में निजामुद्दीन का जिक्र किया है। दु:ख की बात ये है कि निजामुद्दीन के पास आज़ाद हिन्द फ़ौज का आई कार्ड और डी एल होते हुए भी सरकार आखिर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी क्यों नहीं मानती। उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन नहीं मिलती।

 गौरतलब है की मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन ने आजमगढ़ महोत्सव के दौरान निजामुद्दीन को सम्मानित कर सरकारी कोरम को पूरा कर लिया था,लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा व पेन्शन सरकारी पेचीदगियों के चलते उन्हें न मिल सका। निजामुद्दीन आज उम्र के आखिरी पड़ाव में गुमनामी में जी रहें है।
 
( साभार : भास्कर)
(चित्र साभार : आजमगढ़ लाइव)

मंगलवार, नवम्बर 13, 2012

दीपावली पर शुभकामनायें

दीपावली पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
 
 इस शुभ-बेला पर दीपोत्सव का आनंद उठायें और हाँ, घरों में दीये जलाएं न कि पटाखे। पर्यावरण के प्रति हमारी सचेतता ही सुखद भविष्य सुनिश्चित करेगी !!

शनिवार, नवम्बर 03, 2012

आजमगढ़ की धरती से जुड़े कृष्ण कुमार-आकांक्षा को उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा 'अवध सम्मान'



जीवन में कुछ करने की चाह हो तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। हिन्दी-ब्लागिंग के क्षेत्र में ऐसा ही रास्ता अखि़्तयार किया दम्पति कृष्ण कुमार यादव व आकांक्षा यादव ने। उनके इस जूनून के कारण ही आज हिंदी ब्लागिंग को आधिकारिक तौर पर भी विधा के रूप में मान्यता मिलने लगी है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने 1 नवम्बर, 2012 को इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को ‘न्यू मीडिया एवं ब्लागिंग’ में उत्कृष्टता के लिए एक भव्य कार्यक्रम में ‘अवध सम्मान’ से सम्मानित किया गया. जी न्यूज़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ताज होटल, लखनऊ में किया गया था, जिसमें विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया, पर यह पहली बार हुआ जब किसी दम्पति को युगल रूप में यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया. यादव दंपत्ति मूलतः आजमगढ़ के निजामाबाद तहसील स्थित तहबरपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। कृष्ण कुमार जी के पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव जी भी स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त पश्चात् स्वतंत्र अध्ययन और लेखन में प्रवृत्त हैं। ब्लागर दम्पति को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहाँ न्यू मीडिया के रूप में ब्लागिंग की सराहना की, वहीँ कृष्ण कुमार यादव ने अपने संबोधन में उनसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा दिए जा रहे सम्मानों में ‘ब्लागिंग’ को भी शामिल करने का अनुरोध किया. आकांक्षा यादव ने न्यू मीडिया और ब्लागिंग के माध्यम से भ्रूण-हत्या, नारी-उत्पीडन जैसे मुद्दों के प्रति सचेत करने की बात कही. अन्य सम्मानित लोगों में वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, चर्चित लोकगायिका मालिनी अवस्थी, ज्योतिषाचार्य पं. के. ए. दुबे पद्मेश, वरिष्ठ आई.एस. अधिकारी जय शंकर श्रीवास्तव इत्यादि प्रमुख रहे.

जीवन में एक-दूसरे का साथ निभाने की कसमें खा चुके कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव, साहित्य और ब्लागिंग में भी हमजोली बनकर उभरे हैं. कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग और हिन्दी-साहित्य में एक चर्चित नाम हैं, जिनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनके जीवन पर एक पुस्तक ’बढ़ते चरण शिखर की ओर’ भी प्रकाशित हो चुकी है। आकांक्षा यादव भी नारी-सशक्तीकरण को लेकर प्रखरता से लिखती हैं और उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लाग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही सपरिवार विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव का ब्लॉग ‘शब्द-सृजन की ओर’ (http://www.kkyadav.blogspot.in/) जहाँ उनकी साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से रूबरू करता है, वहीँ ‘डाकिया डाक लाया’ (http://dakbabu.blogspot.in/) के माध्यम से वे डाक-सेवाओं के अनूठे पहलुओं और अन्य तमाम जानकारियों को सहेजते हैं. आकांक्षा यादव अपने व्यक्तिगत ब्लॉग ‘शब्द-शिखर’ (http://shabdshikhar.blogspot.in/) पर साहित्यिक रचनाओं के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और विशेषत: नारी-सशक्तिकरण को लेकर काफी मुखर हैं. इस दम्पति के ब्लागों को सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भरपूर सराहना मिली। कृष्ण कुमार यादव के ब्लाग ’डाकिया डाक लाया’ को 98 देशों, ’शब्द सृजन की ओर’ को 75 देशों, आकांक्षा यादव के ब्लाग ’शब्द शिखर’ को 68 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है. सबसे रोचक तथ्य यह है कि यादव दम्पति ने अभी से अपनी सुपुत्री अक्षिता (पाखी) में भी ब्लागिंग को लेकर जूनून पैदा कर दिया है. पिछले वर्ष ब्लागिंग हेतु भारत सरकार द्वारा ’’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’’ से सम्मानित अक्षिता (पाखी) का ब्लाग ’पाखी की दुनिया’ (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी काफी लोकप्रिय है और इसे 98 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है। इसके अलावा इस ब्लागर दम्पति द्वारा ‘उत्सव के रंग’, ‘बाल-दुनिया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’ इत्यादि ब्लॉगों का भी सञ्चालन किया जाता है.

इस अवसर पर उ.प्र. विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, रीता बहुगुणा जोशी, प्रमोद तिवारी, केबिनेट मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, अनुप्रिया पटेल, मेयर दिनेश शर्मा सहित मंत्रिपरिषद के कई सदस्य, विधायक, कार्पोरेट और मीडिया से जुडी हस्तियाँ, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकर्मी व खिलाडी इत्यादि उपस्थित रहे. आभार ज्ञापन जी न्यूज उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के संपादक वाशिन्द्र मिश्र ने किया.

शनिवार, अक्तूबर 13, 2012

ना अबकी ऊ गाँव मिलल


गली मिलल गाँवन कै सुनी
मेंड़ रहल खेतन  कै टूटल
सब रहल  बदलल-बदलल
ना  अबकी ऊ गाँव मिलल।

न मिलने अबकी रामू काका
काकी चूल्हा फूँकत रहल
पतोहिया बईठ अंगना में
फेसबुक पे चैटिंग करत मिलल।

बुढ़िया - बुढवा ओसरा में बईठल
आखिर दिन गिनत रहल
अउर बेटवा  मेहरारू संगे
बाईक पे शहर घुमत मिलल।

आल्हा बिरहा कै मशहूर गवैया
फेंकू कैंसर संग बाजी जीतत रहल
मगर शीला , छाया  अउर  चमेली से
लोकगीत में बाजी हारत मिलल।

जगह-जगह दारू कै  अड्डा
होत अन्धेरा खुलत रहल
सिगरेट के कश में बरबाद
अबकी होत  बचपन मिलल।

गईल जमाना डी-डी  वन के
न केहू चित्रहार देखत रहल
हर घरे  के देवारी पै अबकी
डिस टीवी के छत्ता लटकल मिलल।

इनके काटत उनके पीटत
नेतन जैसन राजनीत रहल
ख़तम मिलल भाई चारा अबकी
शहरीपन कै  भूत चढ़ल मिलल ।

                                                  उपेन्द्र नाथ 

शनिवार, सितम्बर 15, 2012

वरिष्ठ लेखक व ब्लागर श्री राम शिव मूर्ति यादव को 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा द्वारा 'हिंदी भाषा-भूषण' की मानद उपाधि

देश-विदेश में प्रतिष्ठित साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्था 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा ( राजस्थान) ने प्रखर लेखक श्री राम शिव मूर्ति यादव को उनकी हिंदी सेवा के लिए हिंदी दिवस (14 सितम्बर, 2012 ) पर आयोजित दो दिवसीय सम्मलेन में "हिंदी भाषा-भूषण" की मानद उपाधि से अलंकृत किया | हिंदी के विकास को समर्पित इस सम्मलेन में देश-विदेश के तमाम साहित्यकारों और लेखकों ने भाग लिया | गौरतलब है कि 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा की स्थापना आजादी से पूर्व वर्ष 1937 में हुई थी और तभी से यह प्रतिष्ठित संस्था हिंदी को समृद्ध करने और हिंदी-सेवियों को उनके योगदान के आधार पर सम्मानित कर अपनी गौरव-गाथा में वृद्धि कर रही है. इस वर्ष श्री राम शिव मूर्ति यादव को उनकी विशिष्ट हिंदी सेवा के लिए साहित्य-मण्डल, श्रीनाथद्वारा के अध्यक्ष श्री नरहरि ठाकर एवं हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग व साहित्य-मण्डल, श्रीनाथद्वारा के सभापति श्री भगवती प्रसाद देवपुरा ने सारस्वत सम्मान करते हुए उपाधि-पत्र, भगवान श्रीनाथ जी की भव्य स्वर्ण जल से हस्तनिर्मित सुशोभित चित्र एवं अन्य मानद वस्तुएं भेंट किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मलेन में विचार गोष्ठी,सम्मान समारोह व साहित्यकारों द्वारा बैंड बाजों के साथ नगर भ्रमण द्वारा हिंदी का प्रचार -प्रसार व जागरूकता का आयोजन भी किया गया |

उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्ति पश्चात तहबरपुर-आजमगढ़ जनपद निवासी श्री राम शिव मूर्ति यादव एक लम्बे समय से तमाम प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक विषयों पर प्रखरता से लेखन कर रहे हैं। श्री यादव की सामाजिक व्यवस्था एवं आरक्षणनाम से एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है। आपके तमाम लेख विभिन्न स्तरीय संकलनों में भी प्रकाशित हैं। इसके अलावा आपके लेख इंटरनेट पर भी तमाम चर्चित वेब/ई/ऑनलाइन पत्र-पत्रिकाओं और ब्लाग्स पर पढ़े-देखे जा सकते हैं। यदुवंशियों पर आधारित प्रथम हिंदी ब्लॉग यदुकुल” (http://www.yadukul.blogspot.in/) का भी आप द्वारा 10 नवम्बर 2008 से सतत संचालन किया जा रहा है। दुनिया भर के लगभग 65 देशों में पढ़े जाने वाले इस ब्लॉग को 293 से ज्यादा लोग नियमित रूप से अनुसरण करते हैं, वहीँ इस ब्लॉग पर अब तक 315 से ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं। इस ब्लॉग की लोकप्रियता का अंदाजा इसे से लगाया जा सकता है कि आज इस ब्लॉग को करीब 65,000 से ज्यादा लोग पढ़ चुके हैं।

इससे पूर्व श्री राम शिव मूर्ति यादव जी को भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा सामाजिक न्याय सम्बन्धी लेखन एवं समाज सेवा के लिए 'ज्योतिबाफुले फेलोशिप सम्मान' (2007), 'डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान' (2011), अम्बेडकरवादी साहित्य को प्रोत्साहित करने एवं तत्संबंधी लेखन हेतु रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष श्री रामदास आठवले द्वारा अम्बेडकर रत्न अवार्ड 2011', राष्ट्रीय राजभाषा पीठ, इलाहाबाद द्वारा विशिष्ट कृतित्व एवं समृद्ध साहित्य-साधना हेतु भारती ज्योतिसम्मान, आसरा समिति, मथुरा द्वारा बृज गौरव‘, म.प्र. की प्रतिष्ठित संस्था समग्रताशिक्षा साहित्य एवं कला परिषद, कटनी द्वारा 'भारत-भूषण' (2010) की मानद उपाधि से अलंकृत किया जा चूका है। श्री राम शिव मूर्ति यादव को उनके सृजनात्मक एवं मंगलमयी जीवन के लिए अनंत शुभकामनाएं।

-प्रस्तुति : श्री गोवर्धन यादव, संयोजक-राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, छिंदवाडा, मध्य प्रदेश.