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शनिवार, जून 27, 2015

आज़मगढ़ की ब्लॉगर आकांक्षा यादव “परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान“ से सम्मानित

अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, कोलोम्बो-श्री लंका में आज़मगढ़ की  चर्चित ब्लॉगर-लेखिका आकांक्षा यादव को वर्ष 2015 के लिए सार्क देशों में दिए जाने वाले शीर्ष सम्मान “परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान“ से सम्मानित किया गया। 25 मई 2015 को  आयोजित इस पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में आकांक्षा यादव को श्रीलंका के वरिष्ठ नाट्यकर्मी डॉन सोमरथ्न विथाना एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री  श्री नकुल दूबे द्वारा अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह और 21000/- की धनराशि सम्मान स्वरुप  प्रदान की गई । इस अवसर पर ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया में महिलाओं की भूमिका पर आकांक्षा यादव ने प्रभावी व्याख्यान भी दिया। आकांक्षा यादव भारतीय डाक सेवा के अधिकारी एवं सम्प्रति भारत सरकार में निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव की पत्नी हैं, जो की स्वयं चर्चित ब्लॉगर और साहित्यकार हैं। उक्त जानकारी अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स कांफ्रेंस के संयोजक  रवीन्द्र प्रभात ने दी।

       संयोजक  रवीन्द्र प्रभात ने बताया कि आकांक्षा यादव  ने वर्ष 2008 में ब्लाॅग जगत में कदम रखा और विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाॅग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लाॅगिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लाॅगिंग को भी नये आयाम दिये। “शब्द-शिखर“ (http://shabdshikhar.blogspot.in) इनका प्रमुख ब्लॉग है, जो कि हिंदी के लोकप्रिय ब्लॉगों में गिना जाता है।  नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है। इनके ब्लॉग को अब तक लाखों लोगों ने पढा है और करीब सौ ज्यादा देशों में इन्हें देखा-पढा जाता है।

         गौरतलब है कि आकांक्षा यादव को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इससे पूर्व भी ब्लॉगिंग हेतु तमाम प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा  “अवध सम्मान“, हिंदी ब्लॉगिंग के दशक वर्ष में  “दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति“ का सम्मान, नेपाल में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में “परिकल्पना  ब्लॉग विभूषण सम्मान“ से सम्मानित किया जा चुका है।  इसके अलावा विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘डाॅ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘ व ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा मनोहरादेवी स्मृति सम्मान सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु दर्जनाधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं ।


गुरुवार, जनवरी 29, 2015

आजमगढ़ में जन्मे फ्रैंक इस्लाम को मिला 'मार्टिन लूथर किंग पुरस्कार'


प्रसिद्ध भारतीय अमेरिकी उद्यमी एवं परोपकारी फ्रैंक इस्लाम को अंतरराष्ट्रीय सेवा व असैन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए प्रतिष्ठित मार्टिन लूथर किंग जूनियर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आजमगढ़ में जन्मे फ्रैंक इस्लाम को रविवार, 18 जनवरी 2015 को  को मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष हैरी जॉनसन द्वारा एक समारोह में यह पुरस्कार दिय गया। फ्रैंक इस्लाम ने कहा कि वह यह सम्मान पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मार्टिन लूथर किंग और महात्मा गांधी के बीच 'गहरे रिश्ते' थे। 'किंग ने 1954 में भारत की यात्रा की, अहिंसा आंदोलन का अध्ययन किया और महात्मा गांधी के मार्ग पर चले।'

फ्रैंक इस्लाम ने कहा, 'किंग 1954 में भारत दौरे पर गए थे और उन्होंने गांधी से अहिंसा आंदोलन की सीख ली थी। एक भारतीय-अमेरिकी के रूप में किसी महान नेता की याद में सीधे तौर पर या अप्रत्यक्ष तौर पर उन्हें सम्मानित करने वाला यह पुरस्कार पाकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।'

फ्रैंक इस्लाम ने अपने भाषण में कहा, 'किंग और गांधी मेरे निजी जीवन, परमार्थ कार्यों और जन सेवा के कार्यों में मेरे जीवन को आलोकित करने हैं।' इसी तरह किंग पेगी (पेगिलियन बार्टेल) को 'डोरोथी आई हाइट लीडरशिप पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

वार्षिक पुरस्कार की शुरुआत 1991 में जाने माने नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर और महान नेता डोरोथी आई हाइट की याद में की गई थी, जिनका प्रभाव देश और विदेश दोनों जगह रहा है।

आज़मगढ़ के सरायमीर क्षेत्र के नन्दाव गाँव के मूल निवासी फ्रैंक इस्लाम को अमेरिका के प्रतिष्ठित मार्टिन लूथर किंग से सम्मानित किये जाने के बाद से लोगों में ख़ुशी की लहर  दौड़ गयी है। 

उनके परिवार के लोगों ने तो जबसे सूचना पायी है तब से गौरवान्वित हैं। फ्रैंक इस्लाम के  प्रेजिडेंट बराक ओबामा के आगामी हिन्दुस्तान दौरे में साथ आने की सूचना से उत्साहित हैं। 

लोगों का कहना है की इतनी ऊचाईयों पर पहुँचने के बाद भी फ्रैंक इस्लाम कभी अपनी मिट्टी और अपने लोगों को नहीं भूले। ऐसे में जब अमेरिका जैसे देश में आतंकवाद को लेकर तमाम बातें होती हैं उसमे आज़मगढ़ के एक मुस्लिम के अलग ही मुकाम हासिल करने को सकारात्मक नज़रिये से देखा जा रहा है।

रविवार, जनवरी 25, 2015

आज़मगढ़ के ब्लॉगर को भूटान में सम्मान


हिंदी साहित्य और ब्लाॅग पर संस्मरणात्मक सृजन के लिए आज़मगढ़ निवासी चर्चित ब्लाॅगर व साहित्यकार एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव को 15-18 जनवरी 2015 के दौरान भूटान की राजधानी थिम्पू में आयोजित चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में ब्लाॅगिंग हेतु सर्वोच्च “परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’ से सम्मानित किया गया। श्री यादव को उक्त सम्मान भूटान चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के जनरल सेक्रेटरी श्री फूप श्रृंग एवं इंटरनेशनल स्कूल ऑफ भूटान तथा सार्क समिति ऑफ विमेन ऑर्गनाइजेशन  की अध्यक्ष श्रीमती थिनले लम्हा द्वारा दिया गया। सम्मान के तहत 25,000 रूपये की धनराशि, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह, श्रीफल और अंगवस्त्रम  देकर श्री कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित किया गया। उक्त जानकारी सम्मलेन के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने दी। 


राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ 7 पुस्तकों के लेखक एवं हिन्दी ब्लाॅगिंग व सोशल मीडिया को नये आयाम देनेवाले श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व भी शताधिक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। श्री यादव ने वर्ष 2008 में ब्लाॅग जगत में कदम रखा और विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाॅग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लाॅगिंग की तरफ प्रवृत्त किया। कृष्ण कुमार यादव के दो व्यक्तिगत ब्लॉग हैं। इनमें “शब्द सृजन की ओर“ (http://kkyadav.blogspot.com) ब्लॉग सामयिक विषयों, मर्मस्पर्शी कविताओं व जानकारीपरक, शोधपूर्ण आलेखों से परिपूर्ण है; वहीं “डाकिया डाक लाया“ (http://dakbabu.blogspot.com) डाक सेवाओं की रोचक दुनिया को सहेजता है। इन ब्लॉग  को अब तक लाखों लोगों ने पढ़ा है और करीब सौ ज्यादा देशों में इन्हें देखा-पढ़ा जाता है।

     गौरतलब है कि श्री कृष्ण कुमार यादव यादव सिर्फ व्यक्तिशः नहीं बल्कि सपरिवार ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में सशक्त दखल रखते हैं। उनकी सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को जहाँ भारत सरकार द्वारा ब्लाॅगिंग के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, वहीं पत्नी आकांक्षा यादव भी अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं। यादव दम्पति को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा “अवध सम्मान“, हिंदी ब्लॉगिंग के दशक वर्ष में सपत्नीक “दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति“ का सम्मान एवं नेपाल में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में भी सम्मानित किया जा चुका है।  

       सम्मेलन के दौरान वैश्विक परिप्रेक्ष्य विशेषकर सार्क देशों में हिन्दी के पठन-पाठ्न, हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार, न्यू मीडिया के रूप में ब्लॉगिंग के विभिन्न आयामों एवं बदलते दौर में सोशल मीडिया की भूमिका इत्यादि विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भूटान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव श्री फूब शृंग ने कहा कि भूमण्डलीकरण के इस दौर में विभिन्न देशों के साहित्य, संस्कृति एवं परिवेश को ब्लागिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से न सिर्फ महसूस किया जा सकता है बल्कि उसे विस्तार भी दिया जा सकता है। उन्होंने  भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रपति की हालिया भूटान यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय  ब्लागर सम्मेलन को भी उसी कड़ी  में देखने की जरूरत है। सार्क समिति के महिला विंग  की अध्यक्ष श्रीमती थिनले ल्हाम ने कहा कि नारी सशक्तीकरण पर आज विश्व भर में चर्चा हो रही है और ऐसे में सार्क देशों में ब्लागिंग से जुडी तमाम महिलाओं को देखना एक सुखद एहसास देता है। 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ और ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग  न सिर्फ देशों और भाषाओं के बीच दूरियाॅं कम करती है बल्कि यह विभिन्न प्लेटफार्म पर काम कर रहे लोगों के विचारों को एकाकार रूप में देखने की सहूलियत भी देती है । ब्लागिंग व सोशल मीडिया के समाजिक सरोकारों पर चर्चा करते हुए इसे उन्होंने  दूर दराज के इलाकों तक भी जोडने की बात कही। असम विश्वविद्यालय सिल्चर के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नित्यानन्द पाण्डेय  ने कहा कि हिन्दी को समृद्ध करने में ब्लागिंग का महत्वपूर्ण योगदान है और इसके माध्यम से दुनिया भर के लोग हिन्दी से जुड रहे हैं। वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने अपने उद्बोधन में हिंदी ब्लॉगिंग के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए इसे पुस्तकाकार रूप में भी लिपिबद्ध करने की बात कही। 

सम्मेलन के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मलेन आयोजित करने के पीछे उद्देश्य हिंदी संस्कृति को भूटानी संस्कृति के करीब लाना और हिंदी भाषा को यहाँ के वैश्विक वातावरण में प्रतिष्ठापित करना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य दक्षिण एशिया में ब्लॉग के विकास हेतु पृष्ठभूमि तैयार करना, हिंदी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना, भाषायी सौहार्द्रता एवं सांस्कृतिक अध्ययन-पर्यटन का अवसर उपलब्ध कराना है। 


‘‘अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘‘ के दौरान  उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से ब्लॉगर और साहित्यकार एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव, हैदराबाद की सम्पत देवी मुरारका और रायपुर छतीसगढ़ के ललित शर्मा को  सर्वोच्च 'परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान' से नवाजा गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 25,000 की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। साथ ही महाराष्ट्र के औरंगाबाद की अनुवादक सुनीता प्रेम यादव को परिकल्पना सार्क सम्मान प्रदान किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें पाँच  हजार की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के जनपदों मसलन सुल्तानपुर के डॉ राम बहादुर मिश्र को परिकल्पना साहित्य भूषण सम्मान, बाराबंकी के  एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन व डॉ विनय दास को क्रमशः परिकल्पना सोशल मीडिया सम्मान और परिकल्पना कथा सम्मान, लखनऊ की कुसुम वर्मा को परिकल्पना लोक-संस्कृति सम्मान, बहराइच के डॉ अशोक गुलशन को परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान, रायबरेली से सूर्य प्रसाद शर्मा को परिकल्पना साहित्य सम्मान तथा हैदरगढ के ओम प्रकाश जयंत व विष्णु कुमार शर्मा को क्रमशः को परिकल्पना साहित्य श्री सम्मान व परिकल्पना सृजन श्री सम्मान तथा उन्नाव के विश्वंभरनाथ अवस्थी को परिकल्पना नागरिक सम्मान प्रदान किए गए। इसके अलावा इंदौर के प्रकाश हिन्दुस्तानी, रायपुर के गिरीश पंकज, अल्पना देशपांडे, अदिति देशपांडे, दिल्ली की सर्जना शर्मा और निशा सिंह, मुंबई से आलोक भारद्वाज, सिल्चर की डॉ शुभदा पाण्डेय आदि के साथ-साथ  देश-विदेश के लगभग तीस ब्लॉगर्स को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए परिकल्पना सम्मान से नवाजा गया। 

इस अवसर पर पांच पुस्तकों क्रमशः संपत देवी मुरारका की यात्रा वृत्त तृतीय भाग, कुसुम वर्मा की ह्रदय कँवल, सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर की संघर्षों का खेल, विष्णु कुमार शर्मा की दोहावली, अशोक गुलशन की क्या कहूँ किससे कहूँ और परिकल्पना समय पत्रिका के जनवरी अंक के विमोचन के साथ-साथ परिकल्पना कोश  वेबसाईट का लोकार्पण हुआ, वहीं रायपुर छत्तीसगढ़ की अल्पना देशपांडे और अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का लोकार्पण संपन्न हुआ।  इस अवसर पर कुसुम वर्मा के अवधी लोकगीतों की खुशबू में नहाई भूटान की एक शाम। डॉ राम बहादुर मिश्र के कुशल संचालन में सुर सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी प्रवाहित करती काव्य संध्या और ब्लॉग पर हाशिए का समाज परिचर्चा में शामिल हुए भारत और भूटान के एक दर्जन से ज्यादा ब्लोगर्स। कार्यक्रम का  संचालन महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी श्रीमती सुनीता प्रेम यादव ने किया।

शनिवार, नवंबर 22, 2014

युवा साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव को मिलेगा ’दुष्यंत कुमार सम्मान’

प्रसिद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ’आगमन’ ने आजमगढ़ निवासी लोकप्रिय युवा लेखक व साहित्यकार एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव को इस वर्ष के ’दुष्यंत कुमार सम्मान-2014’ के लिए चयनित किया है। उक्त सम्मान श्री यादव को 23 नवम्बर को नोएडा में आयोजित आगमन वार्षिक सम्मान समारोह में प्रदान किया जायेगा। उक्त जानकारी संस्था के संस्थापक श्री पवन जैन ने दी।

गौरतलब है कि सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में भी चर्चित श्री यादव की अब तक कुल 7 पुस्तकें 'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह, 2005) 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह, 2006 व 2007), India Post : 150 glorious years  (2006), 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (संपादित, 2007), ’जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह-2012) एवं ’16 आने 16 लोग’(निबंध-संग्रह, 2014) प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर: कृष्ण कुमार यादव‘‘ (सं0 डाॅ0 दुर्गाचरण मिश्र, 2009, आलोक प्रकाशन, इलाहाबाद) भी प्रकाशित हो चुकी  है। श्री यादव देश-विदेश से प्रकाशित तमाम पत्र पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर भी प्रमुखता से प्रकाशित होते रहते हैं।

 कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी द्वारा ’’साहित्य सम्मान’’, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त द्वारा ”विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान”, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डाॅ0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा ’’पं0 बाल कृष्ण पाण्डेय पत्रकारिता सम्मान’’, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु तमाम सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।   

सोमवार, अक्तूबर 06, 2014

साहित्य में योगदान हेतु पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने कृष्ण कुमार यादव को किया सम्मानित

साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए आजमगढ़ निवासी लोकप्रिय युवा लेखक व साहित्यकार एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी ने सम्मानित किया। उक्त सम्मान श्री यादव को मिर्जापुर में आयोजित एक कार्यक्रम में 5 अक्टूबर, 2014 को प्रदान किया गया। राज्यपाल ने शाल ओढाकर  और सम्मान पत्र देकर श्री यादव को सम्मानित किया। गौरतलब है कि सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में भी चर्चित श्री यादव की अब तक कुल 7 पुस्तकें 'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह, 2005) 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह, 2006 व 2007), India Post : 150 glorious years  (2006), 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (संपादित, 2007), ’जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह-2012) एवं ’16 आने 16 लोग’(निबंध-संग्रह, 2014) प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर: कृष्ण कुमार यादव‘‘ (सं0 डाॅ0 दुर्गाचरण मिश्र, 2009, आलोक प्रकाशन, इलाहाबाद) भी प्रकाशित हो चुकी  है। श्री यादव देश-विदेश से प्रकाशित तमाम रिसर्च जनरल, पत्र पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर भी प्रमुखता से प्रकाशित होते रहते हैं।



श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डाॅ0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा ”विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान”, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा ’’पं0 बाल कृष्ण पाण्डेय पत्रकारिता सम्मान’’, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु शताधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।   

उक्त अवसर पर न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर  के कुलपति प्रो0 पीयूष रंजन अग्रवाल, इग्नू के प्रो चांसलर प्रो0  नागेश्वर राव, बनारस हिन्दू विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 पंजाब सिंह, भोजपुरी फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री सुरजीत सिंह डंग सहित तमाम साहित्यकार, शिक्षाविद, संस्कृतिकर्मी व अधिकारीगण मौजूद रहे।

बुधवार, सितंबर 03, 2014

आजमगढ़ मूल के शख्स फ्रैंक इस्लाम की अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने की तारीफ

अमेरिका में भारतीय मूल के फ्रैंक इस्लाम के लिए मंगलवार (2 सितम्बर, 2014) की सुबह उस वक्त यादगार हो गई जब राष्ट्रपति बराक ओबामा का उनके पास फोन आया और ओबामा ने उनकी तारीफ की. ओबामा ने फोन कर इस्लाम को उनके आलीशान आवास में बने पुस्तकालय के डेस्क की तारीफ की जो व्हाइट हाउस के ओवल कार्यालय में डेस्क ‘रेजोल्यूट’ की प्रतिमूर्ति है. गौरतलब है कि रेजोल्यूट डेस्क को सबसे पहले जॉन एफ कैनेडी ने राष्ट्रपति रहने के दौरान रखवाया था और अब ओबामा इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.वाशिंगटन के उपनगरीय इलाके में इस्लाम ने अपने 10 एकड़ की अपने रिहायशी परिसर में इसी डेस्क की तरह का डेस्क बनवाया है.

बातचीत के दौरान ओबामा ने कहा कि उप राष्ट्रपति जोए बाइडन ने उन्हें उनके घर के बारे में बताया और ओवल कार्यालय के राष्ट्रपति के डेस्क की प्रतिमूर्ति वाले डेस्क की तारीफ की.

ओबामा का फोन आने से पहले बाइडन बीते 11 जुलाई को इस्लाम के घर गए थे और उनके घर की तारीफ की थी.

इस्लाम ने कहा, ‘‘मेरा घर कोई आलीशान घर नहीं, बल्कि एक साधारण घर है. यह घर इस देश को समर्पित किया गया है.’’

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले इस्लाम महज 15 साल की उम्र में अमेरिका गए थे और उस वक्त उनके पास 500 डॉलर से भी कम थे. आज वह एक सफल कारोबारी हैं.
Azamgarh Bloggers Association @ http://azamgarhbloggers.blogspot.in/


रविवार, मार्च 16, 2014

होली पर्व की शुभकामनायें


रंग-बिरंगी होली आई !

खुशियों का खजाना लाई !!

*** होली पर्व की ढेरों शुभकामनायें. सभी द्वेष भूलकर आज के दिन हम सभी एक हों ***

सोमवार, फ़रवरी 10, 2014

आजमगढ़ को अंजुम पर नाज

शायर कैफी आजमी का आजमगढ़, बटाला हाउस कांड जैसे दूसरे अवांछित व अप्रिय कारणों का आजमगढ़ और अब अंजुम आरा का आजमगढ़। अंजुम के दादा इस्माइल शेख और दादी सितारुनिसां का आजमगढ़ और उनकी तरह अंजुम पर आजमगढ़ निहाल है।

कोई एक पल, कोई एक वाकया कैसे बड़े फलक पर असर दिखाता है, यह वर्ष 2012 में देश की दूसरी मुस्लिम महिला आई पी एस बनी अंजुम आरा की सफलता साबित करती है। उनके पैतृक गांव कम्हरिया में जश्न है। 

अंजुम हांलाकि शहर में पढ़ी नहीं हैं, लेकिन उनके पिता अयूब शेख की शिक्षा आजमगढ़ के इसी गाँव में हुई। बाबा-दादी व चाचा अधिवक्ता याकूब शेख अब भी गुलामी का पूरा मोहल्ले में रहते है। 1985 में पिता अयूब को ग्रामीण अभियंत्रण सेवा में अवर अभियंता की नौकरी मिली। पहली तैनाती सहारनपुर हुई तो वह वहीं बस गए। सहारनपुर में ही जन्मी अंजुम चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर की है। बड़े भाई परवेज शेख इंजीनियर हैं, जबकि छोटी बहन सलमा लखनऊ से एमबीए कर रही है। सबसे छोटी रेशमा लखनऊ में ही एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा है।

अयूब भी इस समय लखनऊ में ही तैनात हैं। अंजुम की प्राथमिक शिक्षा गंगोह स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई । इंटर सहारनपुर व स्नातक एवं बीटेक लखनऊ से किया। उसके बाद वह प्रशासनिक सेवा की तैयारी में लग गई। अयूब शेख बच्चों की सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं। उनका कहना है कि हमारे पिता मामूली किसान थे पर उन्होंने खेती कर हम भाइयों को पढ़ाया।

उधर दादा इस्माइल शेख फूले नहीं समाते। अंजुम ने सारे जहाँ की खुशी झोली में डाल दी....... हम बहुत खुशकिस्मत हैं जो पोती की यह कामयाबी देख सके। वाकई आज अंजुम के परिवार ही नहीं, पूरे आज़मगढ़ को उन पर नाज है। 

साभार : दैनिक जागरण, 22 फरवरी, 2013

रविवार, दिसंबर 22, 2013

आज़मगढ़ की गलियों से ओबामा की दोस्ती तक

बराक ओबामा के कई भारतीय मित्र हैं और इन्ही में से एक नाम है आजमगढ़ के फ्रैंक इस्लाम का. जो अब अमरीका के हो गए हैं.
फ्रैंक इस्लाम अमरीका में बसने वाली पहली पीढ़ी से हैं और ओबामा के करीबी मित्र भी हैं. लेकिन सिर्फ इतने भर से ही उनका परिचय खत्म नहीं होता.
फ्रैंक अमरीका में रहने वाले भारतीयों के बीच भी खासे चर्चित और प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं जिनका नाम मिसाल के तौर लिया जाता है.
वो अमरीका में एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाते हैं और करोड़ों डॉलर के मालिक और बड़े निवेशकों में से एक हैं.
वैसे, फ्रैंक अमरीका में जितने जाने जाते हैं उतने ही अपने आजमगढ़ में भी.
उनका जब भी भारत आना होता है वो आजमगढ़ की निजी संस्थाओं को मोटी रकम देकर जाते हैं.

छोटा समुदाय,बड़ा चंदा

चार साल पहले हुए राष्ट्रपति चुनाव में 30 लाख भारतीयों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और 84 प्रतिशत भारतीयों की पसंद ओबामा थे.
अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस चुनाव में भारतीयों का रुख क्या होगा.
फ्रैंक कहते हैं, "हमें विश्वास है कि इस बार भी बराक ओबामा को दोबारा जिताने में भारतीय और पाकिस्तानी समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
ओबामा को वर्जीनिया राज्य से सबसे अधिक चंदा देने वालों में एक नाम फ्रैंक का भी है. फ्रैंक के लिए ओबामा की जीत काफी मायने रखते हैं. फ्रैंक कहते हैं, "मैं बराक ओबामा की चुनावी मुहिम में काफी फंड देता हूँ."

मिशेल की दोस्त

"
फ्रैंक इस्लाम को अमरीका मे रहते हुए 35 साल हो गए हैं. वो अमरीका पढ़ाई करने आए थे और बस यहीं के होकर रह गए.
उनकी पत्नी देबी और उनका 30 सालों का साथ है. व्हाइट हाउस में बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा के साथ अपनी तस्वीर गर्व से दिखाते हुए वो कहते हैं, "वो देखिए सुनहरे बालों वाली मेरी पत्नी राष्ट्रपति के बगल में खड़ी हैं"

प्रभावशाली भारतीय तबका

अमरीका में भारतीय समुदाय छोटा ज़रूर है लेकिन काफी प्रभावशाली है. अमरीका में एक आदमी की औसतन आय सलाना 49 हज़ार डॉलर है लेकिन भारतीयों की सलाना औसत कमाई 88 हज़ार डॉलर है.
फ्रैंक इस्लाम उन लोगों में से हैं जिनके पास पैसे भी हैं और राजनीतिक कनेक्शन भी. वो कहते हैं,"जब भी कोई बड़ी पार्टी होती है तो राष्ट्रपति ओबामा हमें ज़रूर बुलाते हैं".
वो भारतीय समुदाय और राष्ट्रपति के बीच एक कड़ी का काम करते हैं. वो कहते हैं कि उनका काम भारतीयों की तकलीफों और शिकायतों को राष्ट्रपति तक पहुंचाना भी है.
अपने आलीशान दफ्तर में बैठ कर फ्रैंक इस्लाम कहते हैं कि ओबामा की जीत अनिवार्य हैं और उन्हें पता है कि ओबामा लोगों के बीच अब भी लोकप्रिय हैं.

मंगलवार, दिसंबर 17, 2013

भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा कृष्ण कुमार यादव का सम्मान

एक और सम्मान …… भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं युवा साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव को दिल्ली में 12-13 दिसम्बर, 2013 को आयोजित 29वें राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन में सामाजिक समरसता सम्बन्धी लेखन, विशिष्ट कृतित्व एवं समृद्ध साहित्य-साधना और सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान हेतु ‘’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान-2013‘‘ से सम्मानित किया। इससे पूर्व श्री यादव को विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं। 

गौरतलब है कि आज़मगढ़ से निकली तमाम शख्शियतें देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी शोहरत की पताका फहरा रही हैं. इन्हीं में एक नाम उभरकर सामने आता है कृष्ण कुमार यादव का. सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन, ब्लागिंग व सोशल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय 36 वर्षीय श्री कृष्ण कुमार यादव की अब तक कुल 6 पुस्तकें- ”अभिलाषा” (काव्य संग्रह), ”अभिव्यक्तियों के बहाने” व ”अनुभूतियाँ और विमर्श” (निबंध संग्रह), इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस ईयर्ज (2006) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” (2007), ”जंगल में क्रिकेट” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित हैं। इनकी रचनाधर्मिता को देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं, इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर देखा-पढा जा सकता हैं। 

शनिवार, दिसंबर 14, 2013

आकांक्षा यादव ‘’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान-2013‘‘ से सम्मानित

आज़मगढ़ से निकली तमाम शख्शियतें देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी शोहरत की पताका फहरा रही हैं. इन्हीं में एक नाम उभरकर सामने आता है अपनी रचनाओं में नारी सशक्तीकरण  की  अलख जगाने वाली  युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं अग्रणी महिला  ब्लागर आकांक्षा यादव का, जिन्हें दिल्ली में 12-13 दिसम्बर, 2013 को आयोजित 29वें राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन में सामाजिक समरसता सम्बन्धी लेखन, विशिष्ट कृतित्व एवं समृद्ध साहित्य-साधना और सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान हेतु भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने ‘’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान-2013‘‘ से सम्मानित किया। आकांक्षा यादव को इससे पूर्व विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु दर्जनाधिक  सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं। 

गौरतलब है कि नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रूचि रखने वाली आकांक्षा यादव साहित्य, लेखन, ब्लागिंग व सोशल मीडिया के क्षेत्र में एक लम्बे समय से सक्रिय हैं। देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर आकांक्षा यादव की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ निरंतर प्रकाशित होती रहती है। आकांक्षा यादव की 2 कृतियाँ ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” प्रकाशित हैं।

भारतीय दलित साहित्य अकादमी की स्थापनावर्ष 1984 में बाबू जगजीवन राम द्वारा दलित साहित्य के संवर्धन  और प्रोत्साहन हेतु  की गयी थी। 

रविवार, नवंबर 03, 2013

हे दीप मालिके तेरा स्वागत



हे दीप मालिके तेरा स्वागत,

अभिनंदन

तेरी आगवानी में बिछी पलकें ,

तेरा वंदन।

अपनी जहाँ में बरसे खुशियाँ

हर घर आंगन,

दीनता हो कोसो दूर,

हर दिल बसे स्वर्णिम सद्भावना ,

जातिवाद अब ना

समता की उपजे हर दिल सदभावना ,

दुनिया जाने

जातिवाद कुचला है मनोकामना,

दीप मालिके मिट जाए

अपनी जहां से हर तम,

अपनी जहॉ में दीप मालिके,

तेरा आना मंगलमय हो 
,
तेरा अभिनंदन दीप मालिके

पूरी होवे मनोकामना।


- डा . नन्दलाल भारती -

बुधवार, अक्तूबर 16, 2013

18 अक्टूबर से आरंभ होगा द्वितीय आजमगढ़ फिल्मोत्सव

आजमगढ़ : अंधविश्वास के खिलाफ खुद की आहुति देने वाले डा. नरेंद्र दाभोलकर एवं फिल्मों में प्रतिरोध का स्वर मुखर करने वाले बलराज साहनी को समर्पित दूसरा आजमगढ़ फिल्मोत्सव 18 अक्टूबर को कलेक्ट्री कचहरी स्थित नेहरू हाल में शुरू होगा। कार्यक्रम का उद्घाटन दोपहर दो बजे प्रसिद्ध चित्रकार एवं कला विशेषज्ञ अशोक भौमिक करेंगे। इसके साथ ही कार्यक्रम में जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण एवं फिल्मकारों के समूह छह ग्रुप के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी सहित कई फिल्मी व साहित्यिक हस्तियां शामिल होंगी।
यह जानकारी संयोजक डा. विनय सिंह यादव व आयोजन समिति के अध्यक्ष विजय बहादुर राय ने दी है। उन्होंने बताया कि प्रतिरोध का सिनेमा के अंतर्गत होने वाले इस 34वें आयोजन के पहले दिन बलराज साहनी अभिनीत फिल्म 'गरम हवा' का प्रदर्शन होगा। दूसरे दिन यूसुफ सईद और नकुल साहनी की फिल्मों का प्रदर्शन उनकी उपस्थिति में होगा। उसके बाद दोनों फिल्मकार दर्शकों से रूबरू होकर उनके सवालों का जवाब देंगे। फिल्मोत्सव का तीसरा दिन बच्चों को समर्पित होगा। इसमें सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे अपनी पसंद का चित्र बनाएंगे। इसके लिए सामग्री फिल्म महोत्सव समिति उपलब्ध कराएगी। बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों का प्रदर्शन आयोजन स्थल पर किया जाएगा। इसके बाद संजय मट्ट की 'किस्से और कहानियां', बाल फिल्म 'गट्टू' एवं शार्ट फिल्म 'स्टोरी ऑफ स्टफ' का प्रदर्शन किया जाएगा। तीसरे दिन उत्तराखंड में आई आपदा का जिक्र किया जाएगा। इसमें इंद्रेस मैखुरी, मदन चमोली, अतुल सती दर्शकों से रूबरू होंगे। कार्यक्रम का समापन रविवार को सायं सवा सात बजे डा. निशा सिंह यादव द्वारा सितार वादन की प्रस्तुति के साथ होगा।

बुधवार, सितंबर 04, 2013

आज़मगढ़ के ब्लागर दम्पति को नेपाल में मिलेगा ”परिकल्पना साहित्य व ब्लॉग विभूषण सम्मान”


हिंदी ब्लॉगिंग के माध्यम से समाज और साहित्य के बीच सेतु निर्माण के निमित्त चर्चित  ब्लागर एवं इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को क्रमशः ”परिकल्पना साहित्य सम्मान” व  ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान” के लिए चुना गया है। यह सम्मान 13-14 सितंबर 2013 को नेपाल की राजधानी काठमाण्डू के राजभवन में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘ में प्रदान किया जायेगा। इन सम्मान के अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, श्री फल, पुस्तकें अंगवस्त्र और एक निश्चित धनराशि प्रदान किए जाएंगे।

     गौरतलब है कि मूलत: आजमगढ़ वासी यादव दंपति एक लम्बे समय से साहित्य और ब्लागिंग से अनवरत जुडे़ हुए हैं। अभी पिछले वर्ष ही इन दम्पति को उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा न्यू मीडिया ब्लागिंग हेतु ”अवध सम्मान” और हिन्दी ब्लागिंग के दस साल पूरे होने पर ”दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लागर दम्पति” सम्मान से भी नवाजा गया था। कृष्ण कुमार यादव जहाँ “शब्द-सृजन की ओर“ (www.kkyadav.blogspot.com/) और “डाकिया डाक लाया“ (www.dakbabu.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय हैं, वहीं आकांक्षा यादव “शब्द-शिखर“ (www.shabdshikhar.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से। इसके अलावा इस दंपत्ति द्वारा सप्तरंगी प्रेम, बाल-दुनिया और उत्सव के रंग ब्लॉगों का भी युगल संचालन किया जाता है। कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लॉग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लॉग  का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग सामयिक विषयों, मर्मस्पर्शी कविताओं व जानकारीपरक, शोधपूर्ण आलेखों से परिपूर्ण है; वहीं नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है। गौरतलब है कि इस ब्लागर दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को ब्लागिंग हेतु 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) ब्लॉग के लिए सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल  पुरस्कार' प्राप्त हो चुका है। अक्षिता को परिकल्पना समूह द्वारा श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर के ख़िताब से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

    लगभग समान अभिरुचियों से युक्त इस दंपति की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होती रहती है। कृष्ण कुमार यादव की 6 कृतियाँ ”अभिलाषा” (काव्य संग्रह), ”अभिव्यक्तियों के बहाने” व ”अनुभूतियाँ और विमर्श” (निबंध संग्रह), इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस ईयर्ज (2006) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” (2007), ”जंगल में क्रिकेट” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित हैं, वहीं आकांक्षा यादव की एक मौलिक कृति ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित है।

मंगलवार, मई 28, 2013

आजमगढ़ के संतोष यादव बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रदेश में अव्वल


सफलता जिन्दगी में काफी मायने रखती है और विशेषकर तब जब उसके साथ कैरियर भी जुड़ा  हो . आजमगढ़ के निवासी और  बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रदेश में अव्वल संतोष यादव इस सफलता से गदगद है। 

संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा में 301 अंक पाकर उन्होंने  पूरे प्रदेश में सर्वोच्च स्थान पाकर  जिले का मान बढ़ाया है। हालांकि एक बारगी उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास व परिश्रम के बूते उन्हें यह सफलता हासिल हुई है। 

वह सिविल सर्विस में जाना चाहते हैं। इसके लिए जी जान से तैयारी कर रहे हैं। कामयाबी का श्रेय उन्होंने माता-पिता, मित्रों व गुरुजनों को दिया। आज वह जो भी हैं उन्हीं के मार्गदर्शन व आशीर्वाद का परिणाम है।
आजमगढ़ के फूलपुर क्षेत्र के ससना गांव निवासी संतोष के पिता कोमल प्रसाद यादव गुजरात स्थित एक स्टील कंपनी में कार्यरत हैं जबकि मां श्रेया देवी गृहिणी हैं। वह दो भाइयों में सबसे बड़े हैं। छोटे भाई मनोज ने इंटर फाइनल की परीक्षा दी है।

 संतोष की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय में हुई। उन्होंने हाईस्कूल में 78 व इंटरमीडिएट में भी 70 फीसद अंक प्राप्त किए थे। वर्ष 2011 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीए किया। इस वर्ष एमए फाइनल की परीक्षा दे चुके हैं। इसके अलावा हिन्दी में यूजीसी नेट भी क्वालीफाई किया है।

 उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए टिप्स देते हुए बताया कि लक्ष्य के साथ आत्मविश्वास ही कामयाबी की रीढ़ है। किसी भी विषय की पढ़ाई पूरे मनोयोग से करनी चाहिए।

शनिवार, मई 25, 2013

पुण्य तिथि पर याद किये गए चंद्रजीत यादव




आजमगढ़: पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चंद्रजीत यादव की पांचवी पुण्यतिथि पर शुक्रवार, 24 मई 2013 को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। नेहरू हाल के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विधायक डॉ. संग्राम यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव सच्चे राष्ट्रभक्त थे। सिद्धांत के पक्के थे। उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। श्री यादव ने कहा कि पिछड़ों व दलितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए चंद्रजीत यादव आजीवन संघर्ष किया। आज यह देश किधर जा रहा है इस पर सोचने की जरूरत है। आजादी के बाद देश की जो दशा है उस पर यदि नजर दौड़ाई जाय तो यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए हुए पद चिन्हों पर नहीं चलने के कारण समाज की दुर्गति हो रही है। 

विधायक आलमबदी ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने प्रतिभा के धनी थे। पूर्व सांसद बलिहारी बाबू व रामकृष्ण यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने देश ही नहीं विदेशों में भी इस जनपद की अलग पहचान बनाई। रामअचल यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव ने सामाजिक न्याय आंदोलन को खड़ा कर यह बता दिया कि उनके दिल में समाज के प्रति कितना लगाव था। 

कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्व. श्री यादव की धर्मपत्‍‌नी आशा यादव ने स्व. श्री यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। इस अवसर पर जय प्रकाश नारायण, इम्तेयाज बेग, बनवारी लाल जालान, मोती राम यादव, सच्चिदानंद राय, चुन्नन राय, राजकुमार पांडेय, जवाहर सैनी, नरेंद्र सिंह, कैलाश यादव, वसीउद्दीन, संतोष यादव, अशोक यादव, रामजनम यादव, उमा यादव, विजय बहादुर यादव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता विजय बहादुर राय व संचालन वैभव वर्मा ने किया।

(चित्र में : स्व . चंद्रजीत यादव जी की फाइल फोटो)


सोमवार, मार्च 18, 2013

क्रिकेट में दिखा आजमगढ़ कनेक्शन

सरफराज खान उस वक्त आजमगढ़ के अपने गांव बासूपार में थे. वहीं उन्होंने सुना कि मुंबई के हैरिस शील्ड अंडर-16 टूर्नामेंट में अरमान जाफर ने 473 रन बनाकर उनका 439 रनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मुंबर्ई में रहने वाले अपने क्रिकेट कोच पिता नौशाद के साथ सरफराज आजमगढ़ गए थे. आजमगढ़ में छिपी हुई क्रिकेट प्रतिभाओं को ढूंढ़ निकालने और उन्हें मुंबई में मौका देने का श्रेय नौशाद को ही जाता है.
 
नौशाद उत्तर प्रदेश के कस्बेनुमा शहर आजमगढ़ की एक ऐसी कड़ी हैं जो प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को मुंबर्ई पहुंचाते रहते हैं. क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए क्रिकेट की राजधानी मुंबई में वे खुद भी किसी अहम मुकाम से कम नहीं हैं. लेफ्ट आर्म स्पिनर इकबाल अब्दुल्ला घरेलू टूर्नामेंटों में मुंबई की ओर से खेलते हैं और आइपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से. नौशाद के चुने हुए कामयाब खिलाडिय़ों की जमात की उम्दा मिसाल हैं अब्दुल्ला.

आजमगढ़ के दूसरे खिलाड़ी हैं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज कामरान खान. उन्होंने आइपीएल 2009 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए अहम छाप छोड़ी थी. पर तभी गेंद फेंकने के उनके अंदाज पर सवाल उठ खड़े हुए. नोमान खान भी आजमगढ़ के सरायमीर के तेज गेंदबाज हैं, जिन्हें आइपीएल में कुछ सीरीज पहले मुंबई इंडियंस ने अपने लिए अनुबंधित किया था. वे भी नौशाद के ही ढूंढ़े हुए सितारे हैं.

पूर्व क्रिकेटर और अब कोच नौशाद अपने इस काम के बारे में बताते हैं, “मैं हर साल बासूपुर गांव (आजमगढ़ शहर से कुछ किलोमीटर दूर) जाता हूं. लेकिन घर में मैं कम ही रह पाता हूं. घर तो मैं सिर्फ रात में सोने के लिए ही आता हूं. मैं सरफराज के साथ अभ्यास सत्र आयोजित करता रहता हूं और प्रतिभावान बच्चों को ढूंढ़ता रहता हूं.” इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान वे खिलाडिय़ों को प्रेरित करने की अपनी शैली के बारे में बताते हैं, “मैं कुछ मशहूर शायरों के शेर उन नौजवानों को सुनाता हूं. जैसे यही कि एक पत्थर की भी तक़दीर बदल सकती है, शर्त ये है के सलीक़े से तराशा जाए.

अरमान जहां पढ़ रहे हैं, उस रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल के कोच राजू पाठक भी उत्तर प्रदेश में बस्ती जिले की हर्रैया तहसील के हैं. वे बताते हैं कि मुंबई में जो गैर-मराठी बच्चे क्रिकेट खेलने आते हैं, उनका महाराष्ट्र के इस राजधानी शहर में कोई न कोई संपर्क जरूर रहता है. इनमें से कई तो स्प्रिंगफील्ड स्कूल के हॉस्टल में रहते हैं. हम प्रतिभाशाली बच्चों से कोई फीस नहीं लेते. ऊपर से उन्हें क्रिकेट की किट वगैरह भी देते हैं.” यह स्कूल एक ऐसी जगह है जहां क्रिकेट में प्रतिभा रखने वाले बच्चों को उत्साह और आश्रय मिलता है.

लेकिन मुंबर्ई के बाहर से आने वाले और स्थानीय प्रतिभाओं को चुनौती देने वालों के लिए कई बार राह आसान नहीं होती है. मुंबर्ई क्रिकेट एसोसिएशन के एक अधिकारी सचाई बयान करते हैं, “मुंबई वाला भी सैकड़ा मारता है और मुंबर्ई के बाहर वाला भी 100 रन बनाता है तो उसे कोई फायदा नहीं होने का. बाहर से आए खिलाड़ी को नजर में आने के लिए 150-200 रन बनाने होंगे. मुंबर्ई में आकर क्रिकेट में किस्मत आजमाने वालों के लिए थोड़ा भेदभाव तो है.”

सौजन्‍य: इंडिया टुडे

मंगलवार, मार्च 05, 2013

प्रिंट मीडिया ने हाथों-हाथ लिया ‘आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी’ को

आजमगढ़ में हुई द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ को अख़बारों ने हाथों-हाथ लिया। एक तो नौ साल बाद ऐसी प्रदर्शनी, आजमगढ़ से जुड़ी दो महान साहित्यिक विभूतियों पर विशेष डाक आवरण का जारी होना, पूर्वञ्चल में पहली बार माई स्टैम्प सेवा का आरंभ होना, बहुत कुछ इस प्रदर्शनी में था। विभिन्न अख़बारों में प्रकाशित समाचारों को क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

 





 


 



 

 

सोमवार, मार्च 04, 2013

साहित्यिक रूप से उर्वरा रही है आजमगढ़ की धरती – कृष्ण कुमार यादव




द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ का समापन वेस्ली इंटर कॉलेज आजमगढ़ में आयोजित भव्य समारोह में 3 मार्च को किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद व गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने दूसरे दिन के कार्यक्रम का उदघाटन किया। श्री यादव ने इस अवसर पर वीर रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (वर्ष 1907 में ग्राम डुमराव, जिला- आजमगढ़, संप्रति मऊ जनपद में जन्म।) पर विशेष डाक आवरण एवं विरूपण का विमोचन किया। आवरण जारी करने के साथ साथ मुख्य अतिथि श्री यादव ने रिमोट द्वारा इस विशेष आवरण के ब्लो-अप का भी अनावरण किया।

वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (1907 - 1991) पर जारी विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन करते हुए निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्याम नारायण पाण्डेय वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। आप केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे । देश-प्रेम और अपने संस्कृति के प्रति अनुराग ही श्याम नारायण पाण्डेय जी को वीर रस के प्रति आकर्षित करता था। तभी तो उन्होने हल्दीघाटीजौहर जैसे उत्कृष्ट महाकाव्य रचे, जिनमें हल्दीघाटी (काव्य) सर्वाधिक लोकप्रिय और जौहर(काव्य) विशेष चर्चित हुए। हल्दीघाटी में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और जौहर में चित्तौड की रानी पद्मिनी के आख्यान हैं। हल्दीघाटी के नाम से विख्यात राजस्थान की इस ऐतिहासिक वीर भूमि के लोकप्रिय नाम पर लिखे गये हल्दीघाटी महाकाव्य पर आपको उस समय का सर्वश्रेष्ठ सम्मान देव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। श्री यादव ने कहा कि उन्होने आजीवन निश्चल भाव से साहित्य सृजन किया ।

अपने उदबोधन में निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आजमगढ़ की धरती सदैव से ही साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से उर्वर रही है। यह धरा महान विभूतियों की जन्मस्थली-कर्मस्थली रही है, जिन्होने आजमगढ़ का नाम दुनियाभर में फैलाया। ऐसी विभूतियों की स्मृतियों को सहेज कर रखना एवं युवा पीढ़ी को उनके बारे में बताना हमारा कर्तव्य है। डाक विभाग ऐसी विभूतियों पर समय-समय पर डाक टिकट व विशेष आवरण (लिफाफा) जारी कर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने सामाजिक दायित्यों का निर्वहन करता है। श्री यादव ने कहा कि आजमगढ़ की विरासत, स्थापत्य, विभूतियों एवं यहाँ से जुड़े अन्य पहलुओं पर डाक-टिकट एवं विशेष आवरण जारी किए जाने को प्रस्ताव यदि प्राप्त होते हैं तो उन्हे बेहद खुशी होगी।

प्रवर डाक अधीक्षक श्री वाई एन द्विवेदी ने कहा कि एक लंबे अंतराल पश्चात आजमगढ़ में इस प्रकार का आयोजन कर बेहद खुशी हो रही है और जिस तरह से यंहा के लोगों ने प्रदर्शनी को हाथों हाथ लिया है, वह हमारे लिए उत्साहजनक है। इस अवसर पर डा0 शारदा सिंह, पूर्व प्राचार्य, डा0 डी पी, पूर्व प्राचार्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने समापन समारोह में डाक टिकट प्रदर्शनी में विभिन्न ग्रुपों,चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रश्नोतरी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वालों को पुरस्कृत किया। अंतिम दिन होने के चलते माई स्टैम्प के प्रति लोगों का काफी उत्साह दिखा और काफी लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित कराई।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव,जे एम सिन्हा,अनवर जमाल,कमलनाथ यादव,दिलशेर यादव,आर एस सोनकर,डी बी त्रिपाठी,सरदार सिंह यादव सहित तमाम डाक विभाग के अधिकारी, फिलेटिलिस्ट, साहित्यकार एवं शिक्षाविद इत्यादि उपस्थित थे।

(अमर उजाला, 4 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)


(दैनिक जागरण, 4 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)


रविवार, मार्च 03, 2013

‘माई स्टैम्प’ के तहत आजमगढ़ के लोग अपने को डाक-टिकट पर देखकर प्रफुल्लित

डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013, 2-3 मार्च 2013) के दौरान डाक विभाग की बहुचर्चित ' माई स्टैम्प' सेवा का भी शुभांरभ किया गया। इसके तहत चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव सहित तमाम लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित करायी।

आजमपेक्स-2013 के दौरान माई स्टैम्प सेवा 16 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें सिनेरेरिया, डहलिया, लिली और पैन्सी फूलों वाले डाक-टिकट के अलावा 12 राशियों के डाक टिकट शामिल हैं। जहाँ बड़े लोगों में अपनी राशि के साथ डाक.टिकट का क्रेज रहाए वहीँ बच्चों ने रंग.बिरंगे फूलों वाले डाक.टिकटों के साथ अपनी फोटो वाली डाक.टिकटें बनवाईं। कई लोगों ने इस सु.अवसर का भरपूर फायदा उठाया और अपने पूरे परिवार को ही माई स्टैम्प के तहत डाक.टिकटों पर ला दिया। युवाओं में इसके तहत काफी उत्साह देखा गया।

निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि माई स्टैम्प के तहत अपनी तस्वीर वाले डाक-टिकट लगे पत्र देश भर में कहीं भी भेजे जा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं। एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है।

           (जनसंदेश टाइम्स, 2 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)
 
        (हिंदुस्तान, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर : अपना टिकट बनवाने की होड़)