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सोमवार, फ़रवरी 10, 2014

आजमगढ़ को अंजुम पर नाज

शायर कैफी आजमी का आजमगढ़, बटाला हाउस कांड जैसे दूसरे अवांछित व अप्रिय कारणों का आजमगढ़ और अब अंजुम आरा का आजमगढ़। अंजुम के दादा इस्माइल शेख और दादी सितारुनिसां का आजमगढ़ और उनकी तरह अंजुम पर आजमगढ़ निहाल है।

कोई एक पल, कोई एक वाकया कैसे बड़े फलक पर असर दिखाता है, यह वर्ष 2012 में देश की दूसरी मुस्लिम महिला आई पी एस बनी अंजुम आरा की सफलता साबित करती है। उनके पैतृक गांव कम्हरिया में जश्न है। 

अंजुम हांलाकि शहर में पढ़ी नहीं हैं, लेकिन उनके पिता अयूब शेख की शिक्षा आजमगढ़ के इसी गाँव में हुई। बाबा-दादी व चाचा अधिवक्ता याकूब शेख अब भी गुलामी का पूरा मोहल्ले में रहते है। 1985 में पिता अयूब को ग्रामीण अभियंत्रण सेवा में अवर अभियंता की नौकरी मिली। पहली तैनाती सहारनपुर हुई तो वह वहीं बस गए। सहारनपुर में ही जन्मी अंजुम चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर की है। बड़े भाई परवेज शेख इंजीनियर हैं, जबकि छोटी बहन सलमा लखनऊ से एमबीए कर रही है। सबसे छोटी रेशमा लखनऊ में ही एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा है।

अयूब भी इस समय लखनऊ में ही तैनात हैं। अंजुम की प्राथमिक शिक्षा गंगोह स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई । इंटर सहारनपुर व स्नातक एवं बीटेक लखनऊ से किया। उसके बाद वह प्रशासनिक सेवा की तैयारी में लग गई। अयूब शेख बच्चों की सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं। उनका कहना है कि हमारे पिता मामूली किसान थे पर उन्होंने खेती कर हम भाइयों को पढ़ाया।

उधर दादा इस्माइल शेख फूले नहीं समाते। अंजुम ने सारे जहाँ की खुशी झोली में डाल दी....... हम बहुत खुशकिस्मत हैं जो पोती की यह कामयाबी देख सके। वाकई आज अंजुम के परिवार ही नहीं, पूरे आज़मगढ़ को उन पर नाज है। 

साभार : दैनिक जागरण, 22 फरवरी, 2013