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सोमवार, मार्च 18, 2013

क्रिकेट में दिखा आजमगढ़ कनेक्शन

सरफराज खान उस वक्त आजमगढ़ के अपने गांव बासूपार में थे. वहीं उन्होंने सुना कि मुंबई के हैरिस शील्ड अंडर-16 टूर्नामेंट में अरमान जाफर ने 473 रन बनाकर उनका 439 रनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मुंबर्ई में रहने वाले अपने क्रिकेट कोच पिता नौशाद के साथ सरफराज आजमगढ़ गए थे. आजमगढ़ में छिपी हुई क्रिकेट प्रतिभाओं को ढूंढ़ निकालने और उन्हें मुंबई में मौका देने का श्रेय नौशाद को ही जाता है.
 
नौशाद उत्तर प्रदेश के कस्बेनुमा शहर आजमगढ़ की एक ऐसी कड़ी हैं जो प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को मुंबर्ई पहुंचाते रहते हैं. क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए क्रिकेट की राजधानी मुंबई में वे खुद भी किसी अहम मुकाम से कम नहीं हैं. लेफ्ट आर्म स्पिनर इकबाल अब्दुल्ला घरेलू टूर्नामेंटों में मुंबई की ओर से खेलते हैं और आइपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से. नौशाद के चुने हुए कामयाब खिलाडिय़ों की जमात की उम्दा मिसाल हैं अब्दुल्ला.

आजमगढ़ के दूसरे खिलाड़ी हैं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज कामरान खान. उन्होंने आइपीएल 2009 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए अहम छाप छोड़ी थी. पर तभी गेंद फेंकने के उनके अंदाज पर सवाल उठ खड़े हुए. नोमान खान भी आजमगढ़ के सरायमीर के तेज गेंदबाज हैं, जिन्हें आइपीएल में कुछ सीरीज पहले मुंबई इंडियंस ने अपने लिए अनुबंधित किया था. वे भी नौशाद के ही ढूंढ़े हुए सितारे हैं.

पूर्व क्रिकेटर और अब कोच नौशाद अपने इस काम के बारे में बताते हैं, “मैं हर साल बासूपुर गांव (आजमगढ़ शहर से कुछ किलोमीटर दूर) जाता हूं. लेकिन घर में मैं कम ही रह पाता हूं. घर तो मैं सिर्फ रात में सोने के लिए ही आता हूं. मैं सरफराज के साथ अभ्यास सत्र आयोजित करता रहता हूं और प्रतिभावान बच्चों को ढूंढ़ता रहता हूं.” इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान वे खिलाडिय़ों को प्रेरित करने की अपनी शैली के बारे में बताते हैं, “मैं कुछ मशहूर शायरों के शेर उन नौजवानों को सुनाता हूं. जैसे यही कि एक पत्थर की भी तक़दीर बदल सकती है, शर्त ये है के सलीक़े से तराशा जाए.

अरमान जहां पढ़ रहे हैं, उस रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल के कोच राजू पाठक भी उत्तर प्रदेश में बस्ती जिले की हर्रैया तहसील के हैं. वे बताते हैं कि मुंबई में जो गैर-मराठी बच्चे क्रिकेट खेलने आते हैं, उनका महाराष्ट्र के इस राजधानी शहर में कोई न कोई संपर्क जरूर रहता है. इनमें से कई तो स्प्रिंगफील्ड स्कूल के हॉस्टल में रहते हैं. हम प्रतिभाशाली बच्चों से कोई फीस नहीं लेते. ऊपर से उन्हें क्रिकेट की किट वगैरह भी देते हैं.” यह स्कूल एक ऐसी जगह है जहां क्रिकेट में प्रतिभा रखने वाले बच्चों को उत्साह और आश्रय मिलता है.

लेकिन मुंबर्ई के बाहर से आने वाले और स्थानीय प्रतिभाओं को चुनौती देने वालों के लिए कई बार राह आसान नहीं होती है. मुंबर्ई क्रिकेट एसोसिएशन के एक अधिकारी सचाई बयान करते हैं, “मुंबई वाला भी सैकड़ा मारता है और मुंबर्ई के बाहर वाला भी 100 रन बनाता है तो उसे कोई फायदा नहीं होने का. बाहर से आए खिलाड़ी को नजर में आने के लिए 150-200 रन बनाने होंगे. मुंबर्ई में आकर क्रिकेट में किस्मत आजमाने वालों के लिए थोड़ा भेदभाव तो है.”

सौजन्‍य: इंडिया टुडे

मंगलवार, मार्च 05, 2013

प्रिंट मीडिया ने हाथों-हाथ लिया ‘आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी’ को

आजमगढ़ में हुई द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ को अख़बारों ने हाथों-हाथ लिया। एक तो नौ साल बाद ऐसी प्रदर्शनी, आजमगढ़ से जुड़ी दो महान साहित्यिक विभूतियों पर विशेष डाक आवरण का जारी होना, पूर्वञ्चल में पहली बार माई स्टैम्प सेवा का आरंभ होना, बहुत कुछ इस प्रदर्शनी में था। विभिन्न अख़बारों में प्रकाशित समाचारों को क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

 





 


 



 

 

सोमवार, मार्च 04, 2013

साहित्यिक रूप से उर्वरा रही है आजमगढ़ की धरती – कृष्ण कुमार यादव




द्वितीय मण्डल स्तरीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी आजमपेक्स-2013’ का समापन वेस्ली इंटर कॉलेज आजमगढ़ में आयोजित भव्य समारोह में 3 मार्च को किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद व गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने दूसरे दिन के कार्यक्रम का उदघाटन किया। श्री यादव ने इस अवसर पर वीर रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (वर्ष 1907 में ग्राम डुमराव, जिला- आजमगढ़, संप्रति मऊ जनपद में जन्म।) पर विशेष डाक आवरण एवं विरूपण का विमोचन किया। आवरण जारी करने के साथ साथ मुख्य अतिथि श्री यादव ने रिमोट द्वारा इस विशेष आवरण के ब्लो-अप का भी अनावरण किया।

वीर-रस के कवि श्याम नारायण पाण्डेय (1907 - 1991) पर जारी विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन करते हुए निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्याम नारायण पाण्डेय वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। आप केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे । देश-प्रेम और अपने संस्कृति के प्रति अनुराग ही श्याम नारायण पाण्डेय जी को वीर रस के प्रति आकर्षित करता था। तभी तो उन्होने हल्दीघाटीजौहर जैसे उत्कृष्ट महाकाव्य रचे, जिनमें हल्दीघाटी (काव्य) सर्वाधिक लोकप्रिय और जौहर(काव्य) विशेष चर्चित हुए। हल्दीघाटी में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और जौहर में चित्तौड की रानी पद्मिनी के आख्यान हैं। हल्दीघाटी के नाम से विख्यात राजस्थान की इस ऐतिहासिक वीर भूमि के लोकप्रिय नाम पर लिखे गये हल्दीघाटी महाकाव्य पर आपको उस समय का सर्वश्रेष्ठ सम्मान देव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। श्री यादव ने कहा कि उन्होने आजीवन निश्चल भाव से साहित्य सृजन किया ।

अपने उदबोधन में निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आजमगढ़ की धरती सदैव से ही साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से उर्वर रही है। यह धरा महान विभूतियों की जन्मस्थली-कर्मस्थली रही है, जिन्होने आजमगढ़ का नाम दुनियाभर में फैलाया। ऐसी विभूतियों की स्मृतियों को सहेज कर रखना एवं युवा पीढ़ी को उनके बारे में बताना हमारा कर्तव्य है। डाक विभाग ऐसी विभूतियों पर समय-समय पर डाक टिकट व विशेष आवरण (लिफाफा) जारी कर समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने सामाजिक दायित्यों का निर्वहन करता है। श्री यादव ने कहा कि आजमगढ़ की विरासत, स्थापत्य, विभूतियों एवं यहाँ से जुड़े अन्य पहलुओं पर डाक-टिकट एवं विशेष आवरण जारी किए जाने को प्रस्ताव यदि प्राप्त होते हैं तो उन्हे बेहद खुशी होगी।

प्रवर डाक अधीक्षक श्री वाई एन द्विवेदी ने कहा कि एक लंबे अंतराल पश्चात आजमगढ़ में इस प्रकार का आयोजन कर बेहद खुशी हो रही है और जिस तरह से यंहा के लोगों ने प्रदर्शनी को हाथों हाथ लिया है, वह हमारे लिए उत्साहजनक है। इस अवसर पर डा0 शारदा सिंह, पूर्व प्राचार्य, डा0 डी पी, पूर्व प्राचार्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने समापन समारोह में डाक टिकट प्रदर्शनी में विभिन्न ग्रुपों,चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रश्नोतरी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वालों को पुरस्कृत किया। अंतिम दिन होने के चलते माई स्टैम्प के प्रति लोगों का काफी उत्साह दिखा और काफी लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित कराई।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव,जे एम सिन्हा,अनवर जमाल,कमलनाथ यादव,दिलशेर यादव,आर एस सोनकर,डी बी त्रिपाठी,सरदार सिंह यादव सहित तमाम डाक विभाग के अधिकारी, फिलेटिलिस्ट, साहित्यकार एवं शिक्षाविद इत्यादि उपस्थित थे।

(अमर उजाला, 4 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)


(दैनिक जागरण, 4 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)


रविवार, मार्च 03, 2013

‘माई स्टैम्प’ के तहत आजमगढ़ के लोग अपने को डाक-टिकट पर देखकर प्रफुल्लित

डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013, 2-3 मार्च 2013) के दौरान डाक विभाग की बहुचर्चित ' माई स्टैम्प' सेवा का भी शुभांरभ किया गया। इसके तहत चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव सहित तमाम लोगों ने अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित करायी।

आजमपेक्स-2013 के दौरान माई स्टैम्प सेवा 16 डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें सिनेरेरिया, डहलिया, लिली और पैन्सी फूलों वाले डाक-टिकट के अलावा 12 राशियों के डाक टिकट शामिल हैं। जहाँ बड़े लोगों में अपनी राशि के साथ डाक.टिकट का क्रेज रहाए वहीँ बच्चों ने रंग.बिरंगे फूलों वाले डाक.टिकटों के साथ अपनी फोटो वाली डाक.टिकटें बनवाईं। कई लोगों ने इस सु.अवसर का भरपूर फायदा उठाया और अपने पूरे परिवार को ही माई स्टैम्प के तहत डाक.टिकटों पर ला दिया। युवाओं में इसके तहत काफी उत्साह देखा गया।

निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि माई स्टैम्प के तहत अपनी तस्वीर वाले डाक-टिकट लगे पत्र देश भर में कहीं भी भेजे जा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं। एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है।

           (जनसंदेश टाइम्स, 2 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)
 
        (हिंदुस्तान, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर : अपना टिकट बनवाने की होड़)

पं0 अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ अब डाक-आवरण पर


आज़मगढ़ ने तमाम साहित्यिक विभूतियों को पल्लवित-पुष्पित किया है। इन्हीं में से एक प्रमुख नाम है- कवि सम्राट पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का। 'हरिऔध' जी की स्मृति में भारतीय डाक विभाग ने 2 मार्च, 2013 को "आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) के दौरान एक विशेष डाक आवरण और विरूपण जारी किया। उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने इलाहाबाद/गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में इस विशेष डाक आवरण का विमोचन किया।
 

चीफ पोस्टमास्टर जनरल कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी द्वारा रचित खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' का इस समय शताब्दी वर्ष भी मनाया जा रहा है, ऐसे में डाक विभाग द्वारा उन पर विशेष आवरण जारी किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए।
 
 

चर्चित साहित्यकार एवं ब्लागर व सम्प्रति निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने इस अवसर पर हरिऔध जी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हरिऔध जी ने गद्य और पद्य दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी की सेवा की। वे द्विवेदी युग के प्रमुख कवि रहे है। उन्होंने सर्वप्रथम खड़ी बोली में काव्य-रचना करके यह सिद्ध कर दिया कि उसमें भी ब्रजभाषा के समान खड़ी बोली की कविता में भी सरसता और मधुरता आ सकती है।
 

श्री यादव ने कहा कि हरिऔध जी आधुनिक हिंदी खड़ी बोली के पितामह हैं। उन्होंने खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' की रचना करके साहित्य-जगत में शीर्ष स्थान प्राप्त किया । आज भी हरिऔध जी का काव्य ग्रंथ 'प्रिय प्रवास' तथा 'वैदेही वनवास' हिंदी खड़ी भाषा के मील के पत्थर के रुप में स्वीकार किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि हरिऔध जी ने विविध विषयों पर काव्य रचना की है। यह उनकी विलक्षण विशेषता है कि उन्होंने राम-सीता, कृष्ण-राधा जैसे धार्मिक विषयों के साथ-साथ आधुनिक समस्याओं को भी अपनी रचनाओं में लिया है और उन पर नवीन ढंग से अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। वास्तव में देखा जाये तो प्राचीन और आधुनिक भावों के मिश्रण से 'हरिऔध' जी के काव्य में एक अद्भुत चमत्कार उत्पन्न हो गया है।
 

कार्यक्रम में साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह ने हरिऔध जी के जीवन पर प्रकाश डा हुए कहा कि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के निजामाबाद नामक स्थान में हुआ। सन 1889 में हरिऔध जी को सरकारी नौकरी मिल गई। वे कानूनगो हो गए। इस पद से सन 1932 में अवकाश ग्रहण करने के बाद हरिऔध जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अवैतनिक शिक्षक के रूप से कई वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। सन 1941 तक वे इसी पद पर कार्य करते रहे। उसके बाद यह निजामाबाद वापस चले आए। इस अध्यापन कार्य से मुक्त होने के बाद हरिऔध जी अपने गाँव में रह कर ही साहित्य-सेवा कार्य करते रहे। अपनी साहित्य-सेवा के कारण हरिऔध जी ने काफी ख़्याति अर्जित की। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें एक बार सम्मेलन का सभापति बनाया और विद्यावाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किया। सन 1945 ई० में निजामाबाद में आपका देहावसान हो गया।
 

                  (अमर उजाला, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)
 

( हिंदुस्तान 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर : कवि सम्राट पर विशेष डाक आवरण जारी)

शनिवार, मार्च 02, 2013

आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी 'आजमपेक्स-2013' : डाक टिकटों ने बयां की अपनी कहानी

हर डाक टिकट की अपनी एक कहानी है और इस कहानी को वर्तमान पीढ़ी के साथ जोड़ने की जरुरत है। इसी परंपरा में डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय आजमगढ़ डाक टिकट प्रदर्शनी” (आजमपेक्स-2013) का उद्घाटन 2 मार्च 2013 को वेस्ली इंटर कॉलेज, आजमगढ़ में किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन द्वीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर, उ.प्र. परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र द्वारा इलाहाबाद एवं गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित भव्य कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चियों द्वारा सरस्वती वंदना गाकर किया गया।
 
इस प्रदर्शनी में फिलेटलिस्टों द्वारा तमाम डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगायी गयी। कुल 84 फ्रेमों में हजारों की संख्या में डाक-टिकट प्रदर्शित किए गये। इनमें डाक-टिकटों के माध्यम से सिनेमा के 100 वर्ष, भारत की महान नारी विभूतियाँ, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर जारी डाक टिकट, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर जारी डाक टिकट, भारत के प्रिंस-स्टेट, विश्व के जंगी जहाज, विश्व की रेलवे प्रणालियाँ, क्वींस बैटन, इलाहाबाद से संबंधित विषयों पर जारी डाक-टिकटों से लेकर जैव विविधता, रोटरी, स्काउट एवं गाइड, रेड क्रास और एड्स, इत्यादि के विरूद्ध जागरूक करते तमाम रंग-बिरंगे डाक-टिकट प्रदर्शित किये गये। इनमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों द्वारा जारी दुर्लभ डाक-टिकट व डाक-स्टेशनरी भी शामिल थे। प्रदर्शनी में वरिष्ठ फिलेटलिस्टों के अलावा तमाम बच्चों ने भी अपने डाक-टिकटों का प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि आजमगढ़ में 9 वर्ष बाद इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2004 में डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित हुयी थी।
 
प्रदर्शनी के उद्घाटन पश्चात् आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उ.प्र. परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल, कर्नल कमलेश चन्द्र ने कहा कि डाक विभाग सुदूर एवं छोटे-छोटे शहरों में भी डाक-टिकटों के प्रति अभिरुचि पैदा करने हेतु डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित करता है, ताकि आम जन को इससे जोड़ा जा सके। उन्होंने आजमगढ़ की गौरवशाली परम्परा के प्रचार-प्रसार व इसे समृद्ध करने पर जोर दिया। इस कड़ी में डाक-टिकट प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। कर्नल कमलेश चन्द्र ने इस प्रकार की प्रदर्शनियों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने पर जोर दिया, ताकि अभिरुचि के रूप में फिलेटली का विकास हो सके।
 
इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्व और कीमत दोनों ही इससे काफी ज्यादा है । डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। निदेशक यादव ने कहा कि डाक टिकटों के द्वारा ज्ञान भी अर्जित किया जा सकता है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली को और भी मजबूत बना सकते हैं।
 
इस अवसर पर बच्चों हेतु फिलेटलिक वर्कशाप व कला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। बच्चों ने जहाँ डाक टिकट प्रदर्शनी का आनंद लिया, वहीं फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट भी खोले गये। देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत संगीत.संध्या का भी लोगों ने लुत्फ उठाया।
 
 
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रवर डाक अधीक्षक आजमगढ़ श्री वाई एन द्विवेदी एवं आभार ज्ञापन सहायक निदेशक त्रिवेणी प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन एस एन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सीनियर पोस्टमास्टर जी एन प्रसाद, राजेश यादव, साहित्यकार डा0 कन्हैया सिंह, जगदीश प्रसाद बर्नवाल 'कुंद' , डी एन लाल एवं जे एम सिन्हा, अनवर जमाल सहित डाक विभाग के तमाम अधिकारी, कर्मचारी, विद्वतजन, पत्रकार एवं फिलेटिलिस्ट इत्यादि उपस्थित थे।


                (दैनिक जागरण, 3 मार्च 2013 में प्रकाशित विस्तृत ख़बर)