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रविवार, जुलाई 08, 2012

गंगा-जमुनी तहजीब का हिस्सा है आजमगढ़ का निज़ामाबाद

आजमगढ़: ‘‘यह मस्जिद है, वह बुतखाना। या ये मानो या वो मानो। तुम्हें है एक ही राह जाना चाहे यह मानो या वो मानो।’’....अयोध्या नगरी के पड़ोसी जिले आजमगढ़ की फिजा यह एहसास कराती है कि कैसे वहां जब एक ही स्थान पर शिवालय की घंटिया, मस्जिद से उठती अजान की आवाज माहौल में साम्प्रदायिक एकता का रस घोलती है तो गुरूद्वारा भी खुशी से झूम ‘वाहे गुरू’ कह उठता है।

‘यह मस्जिद है, वह बुतखाना’ का फलसफा हमारी गंगा-जमुनी तहजीब का हिस्सा है और निजामाबाद में एक ही स्थान पर दो मस्जिदें, कई मंदिर और गुरूनानक की तपोस्थली साम्प्रदायिक एकता का सन्देश दूर तलक फैलाती है।

अयोध्या के विवादित स्थल के मालिकाना हक पर न्यायालय के फैसले को लेकर दुनिया की निगाहे अयोध्या पर टिकी हैं। तमाम तरह की आशंकाएं सरकार और समाज को भले ही कुछ सोचने पर मजबूर कर रही हों लेकिन अयोध्या के इस पड़ोसी जिले के बाशिंदे इन हालात के लिये धर्म के ठेकेदारों, वोट के सौदागरों और मीडिया के उस वर्ग को दोषी ठहराते हैं जो नकारात्मक बातों को सुखिर्यां बनाती है जिनसे अनावश्यक गलतफहमियां और दूरी पैदा होती है।

अयोध्या से महज 140 किलोमीटर दूर आजमगढ के लोग तो कुछ उत्सुक जरूर हैं मगर किसी प्रकार की क्रिया प्रतिक्रिया और नकारात्मक बातों को सिरे से खारिज करते हैं। हम बात कर रहे है आजमगढ़ जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित टाउन एरिया निजामाबाद की जो तमसा नदी के किनारे बसा है।