- रत्नेश कुमार मौर्या
mauryark@indiatimes.com
http://shabdasahitya.blogspot.in/
इस ब्लॉग का उद्देश्य आजमगढ़ से जुड़े ब्लागर्स को एक मंच पर लाना है. यहाँ आजमगढ़ से सम्बंधित लेख, रचनाएँ, रिपोर्ताज़, व्यक्तित्व के साथ-साथ सदस्य विभिन्न विधाओं में अपनी रचनाएँ भी प्रकाशित कर सकते हैं. इस ब्लॉग का उद्देश्य किसी भी रूप में व्यावसायिक नहीं है और ऐसी किसी भी पोस्ट को हटा दिया जायेगा. सृजन-प्रक्रिया और रचनात्मकता से जुड़े इस ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत है...

नाम-अक्षिता (पाखी)
जन्म- 25 मार्च, 2007 (कानपुर)
मूल निवास - तहबरपुर, आजमगढ़ (यू.पी.)
मम्मी-पापा - श्रीमती आकांक्षा – श्री कृष्ण कुमार यादव
अध्ययनरत - के. जी.-II,
रुचियाँ- ड्राइंग, डांसिंग, प्लेयिंग.
प्रकाशन- इंटरनेट पर ब्लागोत्सव-2010, बाल-दुनिया, नन्हा-मन, सरस पायस, ताऊजी डाट काम, युवा-मन इत्यादि एवं चकमक, टाबर टोली, अनंता, सांवली इत्यादि पत्र-पत्रिकाओं में ड्राइंग/रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रकाशन.
प्रसारण- आकाशवाणी पोर्टब्लेयर से ‘बाल-जगत’ कार्यक्रम में प्रसारण.
ब्लॉग :‘पाखी की दुनिया’ का 24 जून, 2009 को आरंभ. इसमें अक्षिता (पाखी) की ड्राइंग, क्रिएटिविटी, फोटो, परिवार और स्कूल की बातें, घूमना-फिरना, बाल-गीत सहित बहुत कुछ शामिल है. 82 से ज्यादा देशों में अब तक देखे/पढ़े जाने वाली ‘पाखी की दुनिया’ का 200 से ज्यादा लोग अनुसरण करते हैं. 235 से ज्यादा प्रविष्टियों से सुसज्जित इस ब्लॉग को 36,500 से ज्यादा लोगों ने पढ़ा/देखा है. दिल्ली से प्रकाशित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान‘ के अनुसार-‘अक्षिता की उम्र तो बेहद कम है, लेकिन हिन्दी ब्लागिंग में वो एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी है। अक्षिता का ब्लाग बेहद पापुलर है और फिलहाल हिन्दी के टाॅप 100 ब्लॉगों में से एक है।'
विशेष -राजस्थान के वरिष्ठ बाल-साहित्यकार दीन दयाल शर्मा द्वारा अपनी पुस्तक ‘चूं-चूं’ के कवर-पेज पर अक्षिता (पाखी) की फोटो का अंकन. दीन दयाल शर्मा, रावेन्द्र कुमार ‘रवि’, डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’, एस. आर. भारती, डा. दुर्गाचरण मिश्र, द्वारा अक्षिता (पाखी) पर केन्द्रित बाल-गीतों/कविता की रचना.
सम्मान- ब्लागोत्सव -2010 में प्रकाशित रचनाओं की श्रेष्ठता के आधार पर “वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर ” के रूप में सम्मानित. हिंदी साहित्य निकेतन, परिकल्पना डॉट कॉम और नुक्कड़ डॉट कॉम की त्रिवेणी द्वारा हिंदी भवन, नई दिल्ली में 30 अप्रैल, 2011 को आयोजित अन्तराष्ट्रीय ब्लाॅगर्स सम्मलेन में श्रेष्ठ नन्हीं ब्लाॅगर हेतु उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डा0 रमेश पोखरियाल ”निशंक” द्वारा ”हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-2010” अवार्ड.
बाल दिवस, 14 नवम्बर, 2011 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ द्वारा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011 से पुरस्कृत किया. अक्षिता इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभा है. यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया.
पत्र-पत्रिकाओं में चर्चा-दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, शुक्रवार, टाबर टोली, नेशनल एक्सप्रेस, नवोदित स्वर, बाल साहित्य समीक्षा, बुलंद इण्डिया, शुभ्र ज्योत्स्ना, सांवली, सत्य चक्र, इसमासो, हिंद क्रांति, दि मारल, अयोध्या संवाद, अंडमान-निकोबार द्वीप समाचार, The Indian Express, The Echo of India, The Daily Telegrams, Andaman Sheekha, Andaman Express, Aspect इत्यादि तमाम पत्र-पत्रिकाओं में अक्षिता और ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया’ की चर्चा.
अंतर्जाल पर चर्चा- हिंदी मीडिया.इन, स्वतंत्र आवाज़.काम, परिकल्पना, स्वर्गविभा, क्रिएटिव मंच-Creative Manch, बचपन, सरस पायस, बाल-दुनिया, बचपन, शब्द-साहित्य, रैन बसेरा, यदुकुल, Journalist Today, Akhtar Khan Akela इत्यादि तमाम वेब-पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर चर्चा.
संपर्क - पुत्री- श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवा, इलाहाबाद परिक्षेत्र, इलाहाबाद-211001
ई-मेल- akshita_06@rediffmail.com
ब्लॉग- http://www.pakhi-akshita.blogspot.com/ (पाखी की दुनिया)

चार सितंबर 2010 का वह भयावह दिन.. आजमगढ़ जनपद में रास्ते में वैन में लगी गैस किट में शॉर्ट सर्किट की वजह से शोला बनी स्कूली वैन में बच्चे चीख रहे थे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करें। चालक बच्चों को बचाने की बजाय गेट खोलकर भाग गया। इसी बीच आग ने पूरी वैन को चपेट में ले लिया। इन्हीं बच्चों के बीच वाहन में फंसे कक्षा 7 के छात्र ओमप्रकाश यादव ने जान बचाकर भागने की बजाय साहस का परिचय दिया और आठ बच्चों को सकुशल बाहर निकाला और ऐसा करने के दौरान वह 70 प्रतिशत तक जल गए थे। तीन माह तक वह अस्पताल में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहा था। इस दौरान उसकी पढ़ाई भी बाधित हो गयी। खास बात यह हैं कि उसके एक हाथ की प्लास्टिक सर्जरी की भी जरुरत है। वहीं उसके शरीर के घाव अभी तक नहीं भरे हैं. अब उसे इस वीरता के लिए गणतंत्र दिवस प्रधानमंत्री द्वारा संजय चोपड़ा अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। ओमप्रकाश यादव को जब बताया गया कि उसे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने का मौका मिलेगा, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दूसरों की जान बचाने के लिए दाहिना हाथ और चेहरा झुलसा लेने वाले ओम प्रकाश का कहना है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान इलाज के लिए कहेगा। हादसे के डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह जख्मी अंगों की प्लास्टिक सर्जरी करा पाए। ओम प्रकाश यादव ने कहा, "मैं काफी गर्व का अनुभव करता हूं क्योंकि मैंने अपने स्कूल के साथियों का जीवन बचाया। मैं प्रधानमंत्री के हाथों राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने को लेकर काफी खुश हूं। मेरा संदेश है कि लोगों को एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।"
विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के सोलहवें महाधिवेशन (13-14 दिसंबर 2011) में युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को ’विद्यावाचस्पति’ की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। श्री यादव को यह उपाधि उनकी साहित्यिक रचनाशीलता एवं हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदान किया गया। उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में उज्जैन विश्वविद्यालय के कुलपति ने यह उपाधि प्रदान की। श्री कृष्ण कुमार यादव वर्तमान में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर कार्यरत हैं ।
आज के आधुनिक दौर में बच्चों का सृजनात्मक दायरा बढ़ रहा है. वे न सिर्फ देश के भविष्य हैं, बल्कि हमारे देश के विकास और समृद्धि के संवाहक भी. जीवन के हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं. बेटों के साथ-साथ बेटियाँ भी जीवन की हर ऊँचाइयों को छू रही हैं. ऐसे में वर्ष 1996 से हर वर्ष शिक्षा, संस्कृति, कला, खेल-कूद तथा संगीत आदि के क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों हेतु हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' आरम्भ किये गए हैं। चार वर्ष से पन्द्रह वर्ष की आयु-वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार को प्राप्त करने के पात्र हैं.
वर्ष 2011 के लिए 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा प्रदान किये गए. विभिन्न राज्यों से चयनित कुल 27 बच्चों को ये पुरस्कार दिए गए, जिनमें मात्र 4 साल 8 माह की आयु में सबसे कम उम्र में पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता (पाखी) ने एक कीर्तिमान स्थापित किया. गौरतलब है कि इन 27 प्रतिभाओं में से 13 लडकियाँ चुनी गई हैं।
सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री और पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा अक्षिता (पाखी) को यह पुरस्कार कला और ब्लागिंग के क्षेत्र में उसकी विलक्षण उपलब्धि के लिए दिया गया है. इस अवसर पर जारी बुक आफ रिकार्ड्स के अनुसार- ''25 मार्च, 2007 को जन्मी अक्षिता में रचनात्मकता कूट-कूट कर भरी हुई है। ड्राइंग, संगीत, यात्रा इत्यादि से सम्बंधित उनकी गतिविधियाँ उनके ब्लाॅग ’पाखी की दुनिया (http://pakhi-akshita.blogspot.com/) पर उपलब्ध हैं, जो 24 जून, 2009 को आरंभ हुआ था। इस पर उन्हें अकल्पनीय प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। 175 से अधिक ब्लाॅगर इससे जुडे़ हैं। इनके ब्लाॅग 70 देशों के 27000 से अधिक लोगों द्वारा देखे गए हैं। अक्षिता ने नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में 2010 का ’हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना का सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार’ भी जीता है।इतनी कम उम्र में अक्षिता के एक कलाकार एवं एक ब्लाॅगर के रूप में असाधारण प्रदर्शन ने उन्हें उत्कृष्ट उपलब्धि हेतु 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, 2011' दिलाया।''इसके तहत अक्षिता को भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया.
यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है और इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.
नन्हीं बिटिया अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर ढेरों प्यार और शुभाशीष व बधाइयाँ !!
********************************************
मंत्री जी भी अक्षिता (पाखी) के प्रति अपना प्यार और स्नेह न छुपा सकीं, कुछ चित्रमय झलकियाँ....





अमित कुमार यादव : 24 सितम्बर, 1986 को तहबरपुर, आजमगढ़ (उ.प्र.) के एक प्रतिष्ठित परिवार में श्री राम शिव मूर्ति यादव एवं श्रीमती बिमला यादव के सुपुत्र-रूप में जन्म। आरंभिक शिक्षा बाल विद्या मंदिर, तहबरपुर-आजमगढ़, आदर्श जूनियर हाई स्कूल, तहबरपुर-आजमगढ़, राष्ट्रीय इंटर कालेज, तहबरपुर-आजमगढ़ एवं तत्पश्चात इलाहाबाद वि.वि. से 2007में स्नातक और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से 2010 में लोक प्रशासन में एम.ए.। फ़िलहाल अध्ययन के क्रम में इलाहाबाद और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी।
(चित्र में : हिंदी भवन, दिल्ली में 'हिंदी साहित्य निकेतन', परिकल्पना डाट काम, और नुक्कड़ डाट काम द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन में श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) की तरफ से उत्तरांचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक', वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामदरश मिश्र, डा. अशोक चक्रधर इत्यादि द्वारा सम्मान ग्रहण करते अमित कुमार यादव)
हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे 83 वर्षीय रामनरेश यादव को मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। आजमगढ़ के गांव आंधीपुर (अम्बारी) में एक साधारण किसान परिवार में 1 जुलाई 1928 को जन्मे रामनरेश यादव एक शिक्षक और एक अधिवक्ता के रूप में सामाजिक रूप से प्रगति करते हुए आगे चलकर एक ईमानदार और मूल्यों की राजनीति करने वाले आम आदमी के मददगार और एक दिग्गज राजनीतिज्ञ कहलाए। पेशे से वकील श्री यादव राजनारायण के विचारों से प्रभावित हो जनता पार्टी से जुड़े। 1977 में आजमगढ़ लोकसभा सीट से जीतकर वे छठवीं लोकसभा के सदस्य बने।इसी दरमियाँ वह 23 जून 1977 को उप्र के मुख्यमंत्री बने और इस पद पर 28 जून 1979 तक रहे। बाद में श्री यादव कांग्रेस पार्टी से जुड़े और संगठन में विभिन्न पदों पर भी रहे।
श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है।
प्रशासनिक सेवा में रहकर चिन्तन मनन करना एवं साहित्यिक लेखन करना अपने आप में एक विशिष्ट उपलब्धि है। राजकीय सेवा के दायित्वों का निर्वहन और श्रेष्ठ कृतियों की सर्जना का यह मणि-कांचन योग विरले ही मिलता है। कृष्ण कुमार यादव इस विरल योग के ही प्रतीक हैं। सम्प्रति आप भारतीय डाक सेवा के अधिकारी के रूप में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर पदस्थ हैं. देश की तमाम प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन के अलावा उनके कृतित्व में एक काव्यसंकलन "अभिलाषा" सहित दो निबंध-संकलन "अभिव्यक्तियों के बहाने" तथा "अनुभूतियाँ और विमर्श" एवं संपादित कृति "क्रांति-यज्ञ" का प्रकाशन शामिल है. इसके अलावा भारतीय डाक पर अंग्रेजी में लिखी उनकी पुस्तक ''India Post : 150 Glorious Years'' काफी चर्चित रही है. विभिन्न संकलनों में इनकी रचनाएँ सुशोभित हैं तो आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर, पोर्टब्लेयर से समय-समय पर कविताओं, सामयिक लेख, वार्ता का भी प्रसारण होता रहा है. अंतर्जाल पर 'शब्द सृजन की ओर', 'डाकिया डाक लाया' और 'आजमगढ़ ब्लागर्स एसोसिएशन' ब्लॉग का सञ्चालन भी कर रहे हैं।